शहीद स्मारक जैसे पवित्र मंच का राजनीतिकरण और सत्ता की विरुदावली गाना निंदनीय
रिपोर्ट मानस दीक्षित
सैयदराजा।सैयदराजा स्थित शहीद स्मारक पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, प्रखर पत्रकार एवं राजनीतिक सुचिता के प्रतीक पंडित कमलापति त्रिपाठी जी की तुलना मौजूदा सत्ताधारी विधायक से किए जाने पर कांग्रेस पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कांग्रेस प्रवक्ता वैभव कुमार त्रिपाठी ‘डबलू’ ने इसे बेहद निंदनीय, आपत्तिजनक और चाटुकारिता की पराकाष्ठा करार दिया है।
स्वाभिमान और सुचिता का प्रतीक थे पंडित कमलापति त्रिपाठीकड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए वैभव कुमार त्रिपाठी ‘डबलू’ ने कहा कि पंडित कमलापति त्रिपाठी जी का संपूर्ण सार्वजनिक जीवन सत्य, अहिंसा, सत्याग्रह और राजनीतिक सुचिता का प्रतीक रहा है।
चंदौली से आत्मीय जुड़ाव: चंदौली को कृषि के क्षेत्र में पहचान दिलाने और इसे ‘धान का कटोरा’ के रूप में विकसित करने में पंडित जी का ऐतिहासिक योगदान रहा है, जिसे क्षेत्रवासी कभी भूल नहीं सकते।
शहीद स्मारक का मंच सत्ता की विरुदावली गाने के लिए नहीं
वैभव त्रिपाठी ने कहा कि शहीद स्मारक का मंच सर्वसमाज और सभी विचारधाराओं का एक गैर-राजनीतिक मंच होता है। यहाँ सभी दलों के लोग शहीदों को नमन करने आते हैं। इस मंच की परंपरा कभी सत्ता की चाटुकारिता करने की नहीं रही।
उन्होंने घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा:”कार्यक्रम में पहुँचते ही मैंने देखा कि विधायक जी की तारीफ में कसीदे पढ़े जा रहे थे। हद तो तब हो गई जब संचालक ने पंडित कमलापति त्रिपाठी जी द्वारा स्थापित सद्भावना और सुचिता के विचारों की तुलना स्थानीय विधायक से करनी शुरू कर दी। यह तुलना घोर आपत्तिजनक थी। इस चाटुकारिता से आहत होकर, मैंने शहीद स्मारक की गरिमा रखते हुए शहीदों को नमन किया और श्रद्धांजलि अर्पित कर तुरंत वहां से बाहर निकल आया।”
विरासत को छोटा करने की कोशिश स्वीकार्य नहीं
कांग्रेस प्रवक्ता ने दो टूक शब्दों में कहा कि पंडित कमलापति त्रिपाठी जी किसी व्यक्ति विशेष से तुलना का विषय नहीं हैं; वे एक विचार, एक आदर्श और एक गौरवशाली राजनीतिक विरासत हैं। उनकी राजनीति व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र और जनसेवा के लिए समर्पित थी।उन्होंने अपील की कि श्रद्धांजलि कार्यक्रमों और शहीद स्मारक जैसे पवित्र अवसरों को राजनीतिक चाटुकारिता का मंच न बनाया जाए। ऐसे आयोजनों की गरिमा और सर्वदलीय भावना को बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। पंडित जी की विरासत संघर्ष, सुचिता और जनसेवा की है, इसे किसी भी राजनीतिक लाभ के लिए छोटा करने की कोशिश को स्वीकार नहीं किया जाएगा।












