मिर्जापुर: भैरव नेत्र चिकित्सालय में स्टोर की बड़ी लापरवाही, ओपीडी पर्ची खत्म होने पर ‘आरोग्य मंदिर’ की पर्ची पर देखे जा रहे मरीज

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मिर्जापुर: भैरव नेत्र चिकित्सालय में स्टोर की बड़ी लापरवाही, ओपीडी पर्ची खत्म होने पर ‘आरोग्य मंदिर’ की पर्ची पर देखे जा रहे मरीज

मिर्जापुर। जनपद के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में शुमार भैरव नेत्र चिकित्सालय से स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। अस्पताल के स्टोर विभाग की ढिलाई के कारण अस्पताल में आधिकारिक ओपीडी (OPD) पर्चियां ही समाप्त हो गई हैं। स्थिति यह है कि इलाज कराने पहुंच रहे मरीजों को नेत्र चिकित्सालय के बजाय ‘आरोग्य मंदिर’ की पर्चियों पर परामर्श और दवाइयां लिखकर दी जा रही हैं।

नियमों की धज्जियां, मरीजों का रिकॉर्ड खतरे में स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा नियमों के अनुसार, किसी एक समर्पित चिकित्सालय की पर्ची के बजाय किसी अन्य स्वास्थ्य केंद्र (जैसे आयुष्मान आरोग्य मंदिर) की पर्ची का उपयोग करना पूरी तरह गैर-कानूनी और प्रक्रियात्मक रूप से गलत है।

  • मेडिको-लीगल रिकॉर्ड का संकट: यदि किसी मरीज की दवा, मोतियाबिंद ऑपरेशन या इलाज के दौरान कोई प्रतिकूल घटना (Adverse Reaction) होती है, तो आरोग्य मंदिर की पर्ची कानूनी दस्तावेज के रूप में अमान्य साबित हो सकती है।
  • बजट और इन्वेंट्री में धांधली: ओपीडी पर्चियों का रिकॉर्ड अस्पताल के दैनिक मरीजों की संख्या और बजट आवंटन से जुड़ा होता है। गलत पर्ची के इस्तेमाल से सरकारी रिकॉर्ड और फंड के ऑडिट पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
  • मरीजों में असमंजस: दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीज इस बात से बेखबर हैं कि जिस कागज़ पर उनकी आंखों की जांच का ब्योरा लिखा जा रहा है, वह उस अस्पताल का आधिकारिक दस्तावेज है ही नहीं।

स्टोर प्रभारी की भूमिका पर उठे सवाल अस्पताल प्रशासन में स्टोर विभाग का प्राथमिक कार्य अग्रिम रूप से आवश्यक पर्चियों, रजिस्टरों और दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना होता है। पर्ची पूरी तरह खत्म हो जाना और वैकल्पिक व्यवस्था के नाम पर दूसरे केंद्र की पर्चियों का इस्तेमाल करना यह दर्शाता है कि स्टोर प्रबंधन में भारी लापरवाही बरती गई है।

उच्च अधिकारियों के संज्ञान का इंतजार स्थानीय नागरिकों और समाजसेवियों ने इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी कर्मचारियों पर तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है। अब देखना यह होगा कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) और क्षेत्रीय स्वास्थ्य प्रशासन इस गंभीर लापरवाही पर क्या कड़ा कदम उठाते हैं।

Vikash Tiwari
Author: Vikash Tiwari

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