नजूल विधेयक में व्यापक संशोधन की मांग, CM ने अगली बैठक में मांगा प्रदेशभर की नजूल संपत्तियों का पूरा ब्यौरा

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नजूल विधेयक में व्यापक संशोधन की मांग, CM ने अगली बैठक में मांगा प्रदेशभर की नजूल संपत्तियों का पूरा ब्यौरा

रिपोर्ट पवन जायसवाल

लखनऊ उत्तर प्रदेश नजूल संपत्ति (लोक प्रयोजनार्थ प्रबन्ध और उपयोग) विधेयक, 2024 को लेकर बुधवार को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में प्रवर समिति की बैठक हुई। बैठक में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा नामित सदस्य एवं विधान परिषद सदस्य आशुतोष सिन्हा ने विधेयक की विभिन्न धाराओं में व्यापक संशोधन के प्रस्ताव समिति के समक्ष रखे।

आशुतोष सिन्हा ने कहा कि नजूल संपत्तियों को लेकर ऐसा कानून बनाया जाना चाहिए, जिसमें सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा और पारदर्शिता के साथ वर्षों से वैध रूप से रह रहे नागरिकों, पट्टेदारों, गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के हितों की भी रक्षा हो।

उन्होंने न्यायालयों में लंबित मामलों, पुराने पट्टेदारों के अधिकार, फ्रीहोल्ड संपत्तियों, बेदखली, मुआवजा और पुनर्वास के अलावा अधिकारियों के विवेकाधीन अधिकार तथा नजूल भूमि के भविष्य में उपयोग और आवंटन में पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर संशोधन की मांग रखी।

जिलेवार ब्यौरे की मांगआशुतोष सिन्हा ने कहा कि प्रदेश में नजूल संपत्तियों को लेकर किसी व्यापक नीति से पहले सरकार के पास वास्तविक और प्रमाणित आंकड़े होना जरूरी है। उन्होंने प्रदेश की नजूल संपत्तियों का जिलेवार और तथ्यात्मक विवरण प्रवर समिति के सामने प्रस्तुत करने की मांग की।उनकी मांग पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अगली बैठक में पूरे प्रदेश की नजूल संपत्तियों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया जाए।

इसमें कुल नजूल संपत्तियों की संख्या, न्यायालयों में लंबित संपत्तियों, फ्रीहोल्ड की जा चुकी संपत्तियों और अवैध कब्जे वाली संपत्तियों समेत अन्य जरूरी तथ्य एवं अभिलेख शामिल करने को कहा गया है हर संशोधन प्रस्ताव पर मांगा स्पष्ट जवाबबैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि आशुतोष सिन्हा की ओर से प्रवर समिति के समक्ष रखे गए प्रत्येक संशोधन प्रस्ताव का कानून और तथ्यों के आधार पर परीक्षण किया जाए।

अधिकारियों को अगली बैठक में प्रत्येक प्रस्ताव पर अपना स्पष्ट जवाब और प्रस्ताव लेकर उपस्थित होने के निर्देश दिए गए।आशुतोष सिन्हा ने कहा कि नजूल संपत्ति सार्वजनिक संपत्ति है और उसकी सुरक्षा व पारदर्शी उपयोग सरकार की जिम्मेदारी है। हालांकि, इसके नाम पर दशकों से वैध रूप से रह रहे लोगों, पट्टेदारों और कमजोर वर्ग के लोगों के हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि कानून ऐसा होना चाहिए, जो सरकारी संपत्ति को अवैध कब्जे से बचाने के साथ भ्रष्टाचार और मनमानी पर रोक लगाए तथा आम नागरिकों के वैध अधिकारों और न्यायिक प्रक्रिया की भी पूरी रक्षा करे।उन्होंने कहा कि प्रवर समिति में उनका प्रयास रहेगा कि नजूल विधेयक में ऐसी स्पष्ट और पारदर्शी व्यवस्था बने, जिसमें सरकारी संपत्ति की सुरक्षा के साथ आम नागरिकों को न्याय, सुनवाई, मुआवजा और पुनर्वास का अधिकार मिले और अधिकारियों के मनमाने फैसलों की गुंजाइश खत्म हो।

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