ईश्वर दर्शन ही शाश्वत भक्ति की पहली सीढ़ी: चौगानपुर में श्री हरि कथा की धूम

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​ग्राम चौगानपुर में श्री हरि कथा के दूसरे दिन उमड़ा जनसैलाब: ‘ईश्वर दर्शन ही वास्तविक भक्ति का आधार’

रिपोर्ट दीपक चौहान

​चौगानपुर: ग्राम पंचायत घर के प्रांगण में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (DJJS) द्वारा आयोजित तीन दिवसीय ‘श्री हरि कथा’ के दूसरे दिन अध्यात्म और भक्ति की अविरल धारा बही। इस अवसर पर संस्थान के संस्थापक सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी उज्ज्वला भारती जी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भक्ति के गूढ़ रहस्यों से अवगत कराया।

भक्ति केवल मानना नहीं, ईश्वर को जानना है​कथा के दौरान साध्वी जी ने स्पष्ट किया कि शास्त्रों के अनुसार भक्ति के बिना वास्तविक सुख संभव नहीं है। उन्होंने कबीर दास जी की वाणी और प्राचीन भक्तों (प्रह्लाद, ध्रुव, मीराबाई) का उदाहरण देते हुए कहा कि:

​सच्ची भक्ति का प्रारंभ:

भक्ति केवल बाहरी कर्मकांड नहीं, बल्कि पूर्ण गुरु की शरण में जाकर ईश्वर का प्रत्यक्ष साक्षात्कार करना है

।​विभक्ति बनाम भक्ति: जब हम मन की मर्जी से चलते हैं तो वह ‘विभक्ति’ (अलगाव) है, लेकिन जब हम अंतर्घट में भगवान को देख लेते हैं, तब वह वास्तविक ‘भक्ति’ (जुड़ाव) कहलाती है।​

दिव्य चक्षु: गुरु कृपा से जब मनुष्य का ‘तीसरा नेत्र’ खुलता है, तभी वह उस अगोचर परमात्मा को देख पाता है जिसकी प्रार्थना हम प्रतिदिन आरती में करते हैं।

भजनों ने बांधा समां

​कार्यक्रम में साध्वी उर्मिला भारती जी और साध्वी वेदवाणी भारती जी के सुमधुर व प्रेरणादायक भजनों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कथा श्रवण के लिए सैकड़ों की संख्या में स्थानीय ग्रामीण और श्रद्धालु उपस्थित रहे।​

अध्यात्म के साथ सामाजिक सरोकार​

कथा के दौरान बताया गया कि संस्थान केवल आध्यात्मिक उन्नति तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज कल्याण के लिए भी समर्पित है। आशुतोष महाराज जी के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे

प्रमुख सामाजिक प्रकल्पों की जानकारी दी गई:​

बोध: नशा मुक्ति अभियान

​संतुलन: महिला सशक्तिकरण एवं कन्या भ्रूण हत्या रोकथाम​

आरोग्य:

स्वास्थ्य सेवाएं​ कामधेनु:

देसी गौ संवर्धन​अन्तर्दृष्टि

: दिव्यांग सहायता​ अन्तर्क्रांति:

बंदी सुधार कार्यक्रम​ मंथन:

शिक्षा का प्रसार​ संरक्षण:

पर्यावरण सुरक्षा​ समाधान: आपदा राहत

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