वाराणसी हर साल की तरह इस साल भी काशी की परंपरा और आस्था का अनोखा स्वरूप देखने को मिला।
धर्मनगरी काशी में रंगभरी एकादशी के ठीक एक दिन बाद एक अलग ही होली का रंग चढ़ा। यह होली थी मसाने की होली, जहाँ गुलाल और अबीर की जगह चिता की भस्म उड़ी और श्मशान घाट पर भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा। यह है वाराणसी की प्रसिद्ध मसान की होली, जो सदियों से चली आ रही परंपरा का हिस्सा है।इस मौके पर सबसे पहले बाबा मसान की विशेष आरती की गई। आरती के बाद भक्तों ने बाबा को चिता की भस्म अर्पित की। ऐसी मान्यता है कि बाबा मसान को भस्म अर्पण करने से भक्त के सभी पाप और दुःख नष्ट हो जाते हैं।
इस अनुष्ठान से भक्त को मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है और उसका जीवन मंगलमय बन जाता है।इस दौरान भक्तों ने ‘बम बम’ के नारों से पूरे वातावरण को भक्तिमय कर दिया। स्थानीय श्रद्धालुओं और दूर-दराज से आए संतों-महंतों ने इस अनोखी होली में हिस्सा लिया और एक-दूसरे पर भस्म फेंककर इस परंपरा को निभाया।क्या है मसान की होलीयह होली वाराणसी के मसान घाट (श्मशान घाट) पर खेली जाती है। यहाँ का मानना है कि भस्म ही सबसे उत्तम रंग है, जो जीवन और मृत्यु के सत्य को दर्शाता है। भक्त बाबा मसान से जीवन के कल्याण और मृत्यु के भय से मुक्ति की कामना करते हैं










