कागजों में स्वच्छ, धरातल पर नरक: DPRO और BDO की अनदेखी से ‘डंपिंग यार्ड’ बना भोजपुर/रतनपुर गाव, 2 महीने में 1 दिन दर्शन देते हैं सफाईकर्मी!

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​”2 महीने में 1 बार आते हैं कर्मचारी, हम क्या करें?”… प्रधान प्रतिनिधि की बेबसी और अफसरों की बेरुखी से घुट रहा भोजपुर/रतनपुर का दम!

पड़ाव/चंदौली

एक तरफ जहां सरकार स्वच्छता अभियानों पर पानी की तरह पैसा बहा रही है, वहीं चंदौली जिले के नियमताबाद ब्लॉक अंतर्गत भोजपुर/रतनपुर ग्राम सभा में विभागीय लापरवाही और जिम्मेदार अधिकारियों की घोर उपेक्षा के कारण स्थिति भयावह बनी हुई है। गांव में सफाई व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। मुख्य रास्तों, खाली प्लाटों और निजी बाउंड्री वॉल के पास कूड़े के विशाल पहाड़ खड़े हो गए हैं, जिससे उठती तीखी सड़ांध और बदबू के बीच मासूम बच्चे अपनी नाक बंद करके स्कूल जाने को मजबूर हैं।

सड़कों पर कूड़ा फेंकने को क्यों मजबूर हुए ग्रामीण?

गांव में 2 सफाई कर्मचारी कागजों पर तैनात हैं, लेकिन जमीनी सच यह है कि वे 2 महीने में महज एक बार गांव का रुख करते हैं। वह भी केवल एक कोने में औपचारिकता निभाकर गायब हो जाते हैं। गांव का लगभग तीन-चौथाई (3/4) हिस्सा महीनों से सफाई का इंतजार कर रहा है।

जब नालियां उफनकर गलियों में बहने लगीं और घरों के बाहर गंदगी का अंबार लग गया, तो ग्रामीणों के पास कोई विकल्प नहीं बचा। मजबूरन लोगों को मुख्य रास्तों और बाउंड्री के पास कचरा फेंकना पड़ रहा है, जिससे पूरा गांव ‘डंपिंग यार्ड’ में तब्दील हो चुका है। सड़ी हुई नालियों और कचरे के ढेरों से डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड जैसी बीमारियों का गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

प्रधान प्रतिनिधि का बयान: “कर्मचारी दो महीने में एक बार आते हैं, हम क्या करें

इस नारकीय स्थिति पर ग्राम प्रधान प्रतिनिधि से जवाब मांगा, तो उन्होंने अपनी लाचारी जताते हुए कहा कि “सफाई कर्मचारी दो महीने में सिर्फ एक ही बार आते हैं, इसमें हम क्या कर सकते हैं?”

प्रधान प्रतिनिधि का यह बयान ब्लॉक से लेकर जिला स्तर तक के प्रशासनिक तंत्र की पोल खोल कर रख देता है। सवाल यह उठता है कि क्या गांव के चुने हुए प्रतिनिधि भी अधिकारियों की हठधर्मिता के आगे पूरी तरह बेबस हो चुके हैं? जब अधिकारियों पर जनप्रतिनिधियों की बात का कोई असर नहीं हो रहा, तो आम जनता की सुध कौन लेगा?

DPRO और BDO की कार्यशैली पर खड़े हो रहे बड़े सवाल

सफाई कर्मचारियों की इस मनमानी और विभागीय चुप्पी से साफ है कि ब्लॉक और जिला स्तर के अधिकारियों का अपने कर्मचारियों पर कोई नियंत्रण नहीं रह गया है।

क्या जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) चंदौली केवल कागजी निरीक्षण तक सीमित हैं?​

क्या नियमताबाद के खंड विकास अधिकारी (BDO) और पंचायत सचिव को सड़कों पर फैले कूड़े और मासूम बच्चों की इस दुर्दशा की भनक तक नहीं है?

​क्या अधिकारियों की नजर में गांव के लोगों और स्कूली बच्चों की सेहत की कोई कीमत नहीं है?​

यदि अधिकारी समय रहते गांव का निरीक्षण करते और गैर-हाजिर कर्मचारियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई करते, तो आज भोजपुर/रतनपुर के ग्रामीणों और मासूम बच्चों को यह नरक भोगने पर मजबूर न होना पड़ता।

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