खुला चैलेंज: छतारी थाने के सामने से गुजरती है ‘अवैध मिट्टी’, पुलिस की नींद क्यों नहीं खुलती?
रिपोर्ट दीपक चौहान
बुलंदशहर (छतारी): थाना छतारी क्षेत्र के विभिन्न गांवों और खाली प्लॉटों में इन दिनों अवैध मिट्टी खनन का काला कारोबार चरम पर है। हैरत की बात यह है कि जहाँ एक ओर सरकार अवैध खनन पर जीरो टॉलरेंस की नीति का दावा करती है, वहीं छतारी में खनन माफिया कानून को ठेंगा दिखाकर रातों-रात धरती का सीना छलनी कर रहे हैं।
पांडवाल चौकी और थाने के सामने से गुजरते ‘यमदूत’
स्थानीय सूत्रों और चश्मदीदों के मुताबिक, रात ढलते ही जेसीबी और लोडर मशीनों की गूंज शुरू हो जाती है। भारी-भरकम डंपरों में अवैध मिट्टी भरकर उन्हें गंतव्य तक पहुँचाया जाता है। चौंकाने वाली बात यह है कि ये डंपर पांडवाल चौकी और खुद थाना छतारी के सामने से सीना तानकर गुजरते हैं, लेकिन मजाल है कि किसी जिम्मेदार अधिकारी का हाथ इन पर रुकने के लिए उठे।
प्रशासन की चुप्पी: मिलीभगत या मजबूरी?
क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है कि आखिर पुलिस और राजस्व विभाग इस कदर मेहरबान क्यों हैं?
अंधेरी रात में बिना किसी डर के फर्राटा भरते ये डंपर प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं
:क्या इन खनन माफियाओं को खाकी और खादी का खुला संरक्षण प्राप्त है?
बिना किसी वैध परमिट के इतने बड़े पैमाने पर खनन कैसे संभव है?
क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
खतरे में राहगीर, कौन लेगा हादसे की जिम्मेदारी?
स्थानीय निवासियों में भारी रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि रात के अंधेरे में ये डंपर इतनी तेज रफ्तार में चलते हैं कि सड़कों पर चलना मुहाल हो गया है। धूल के गुबार और अनियंत्रित गति के कारण कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है। ग्रामीणों ने तीखा सवाल पूछा है— “अगर इन डंपरों से कोई कुचला गया, तो क्या पुलिस इसकी जिम्मेदारी लेगी?”











