चंदौली में गूँजा ‘सारे जहाँ से अच्छा’, बीएचयू के विभागाध्यक्ष ने की सेमिनार की अध्यक्षता

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मिर्ज़ा ग़ालिब और अल्लामा इक़बाल की शायरी में उर्दू ज़बान की अहमियत पर चंदौली में सेमिनार

पड़ाव/चंदौली

📚 ‘ग़ालिब और इक़बाल की शायरी में उर्दू का महत्व’ पर सेमिनार

चंदौली: यूनिवर्सल ह्यूमन वेलफेयर सोसायटी और उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में चंदौली के पड़ाव स्थित अल हनीफ एजुकेशनल सेंटर में मिर्ज़ा ग़ालिब और अल्लामा इक़बाल को समर्पित ‘भारतीय एकता और उर्दू ज़बान की महत्ता’ पर एक सेमिनार आयोजित किया गया।लखनऊ विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग के डॉ. फ़ाज़िल हाशमी ने मिर्ज़ा ग़ालिब की शायरी को आधुनिक काल के लिए सर्वश्रेष्ठ बताया, जबकि बीएचयू के फारसी विभाग के अध्यक्ष डॉ. मोहम्मद अक़ील ने अल्लामा इक़बाल की प्रसिद्ध कविताओं का उल्लेख किया।

सेमिनार की अध्यक्षता बीएचयू उर्दू विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आफ़ाक़ अहमद आफ़ाक़ी ने की, जिन्होंने इक़बाल का देशप्रेम से भरा तराना-ए-हिन्द “सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा” भी पढ़ा।आयोजक शफ़क़त अब्बास पाशा और सह-कन्वीनर रुबी रेहाना ने अतिथियों का सम्मान किया। इस मौके पर कई शायरों ने शेरो-शायरी के माध्यम से दोनों महान कवियों को याद किया। कार्यक्रम में हाजी वसीम अहमद द्वारा समाजसेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को भी सम्मानित किया गया। बड़ी संख्या में विद्वान और उर्दू प्रेमी उपस्थित रहे।

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