जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने वाले पीड़ित पर दबाव बनाने का आरोप, स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

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मिर्जापुर: जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने वाले पीड़ित पर दबाव बनाने का आरोप, स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

मीरजापुर। उत्तर प्रदेश शासन द्वारा पारदर्शी व्यवस्था और त्वरित निस्तारण के लिए संचालित समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली (IGRS / जनसुनवाई पोर्टल) की साख पर मिर्जापुर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के रवैये से सवाल खड़े होने लगे हैं। आरोप है कि पोर्टल पर की गई एक शिकायत की निष्पक्ष जांच करने के बजाय स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी सीएमओ (Deputy CMO) द्वारा शिकायतकर्ता पर दबाव बनाया जा रहा है ताकि मामले में मनमाफिक और अधिकारियों के पक्ष में आख्या (रिपोर्ट) लगाई जा सके।

क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित (प्रार्थी) ने स्वास्थ्य विभाग और उससे संबद्ध सेवाओं में अनियमितता/लापरवाही को लेकर एकीकृत जनसुनवाई (IGRS) पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई थी। नियमतः संबंधित अधिकारी को मौके पर जाकर या साक्ष्यों के आधार पर पारदर्शी जांच कर रिपोर्ट शासन को भेजनी होती है।

लेकिन पीड़ित का गंभीर आरोप है कि निस्तारण अधिकारी (डिप्टी सीएमओ) द्वारा समस्या का समाधान करने के स्थान पर शिकायत वापस लेने अथवा अधिकारियों के अनुकूल आख्या (रिपोर्ट) पर सहमति जताने के लिए अनुचित दबाव डाला जा रहा है।

दबाव बनाने की कार्यशैली पर खड़े हो रहे सवाल

  1. अधिकारियों द्वारा अनुचित दबाव: पीड़ित के अनुसार, शिकायत के समाधान की जगह उन्हें बार-बार मौखिक रूप से या व्यक्तिगत स्तर पर बुलाकर मामले को रफा-दफा करने के लिए कहा जा रहा है।
  2. पोर्टल की मंशा को झटका: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा है कि जनसुनवाई पोर्टल पर आने वाली प्रत्येक शिकायत का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण हो। हालांकि, जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा शिकायतकर्ता पर रिपोर्ट में दस्तखत करने या संतुष्टि जताने का दबाव बनाना ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ नीति का सीधे तौर पर उल्लंघन है।
  3. फर्जी या लीपापोती आख्या का अंदेशा: पीड़ित ने आशंका जताई है कि यदि वे दबाव में नहीं आते हैं, तो विभाग द्वारा एकतरफा और भ्रामक रिपोर्ट तैयार कर पोर्टल पर केस को ‘निस्तारित’ (Close) कर दिया जाएगा।

पीड़ित की मांग

  • उच्चस्तरीय जांच: मामले की निष्पक्ष जांच जिला अधिकारी (DM) या विंध्याचल मंडल के अपर निदेशक (स्वास्थ्य) स्तर से कराई जाए।
  • दोषियों पर कार्रवाई: निष्पक्ष जांच प्रभावित करने और फर्जी रिपोर्ट लगाने का दबाव बनाने वाले डिप्टी सीएमओ के खिलाफ दंडात्मक विभागीय कार्रवाई की जाए।
  • सुरक्षा और न्याय: शिकायतकर्ता ने प्रशासन से मांग की है कि उन्हें किसी भी तरह के उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान करते हुए मूल शिकायत पर न्यायोचित कार्रवाई की जाए।

प्रशासनिक रुख: इस मामले में जब संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों से बात करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने दबाव बनाने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पोर्टल की नियमावली के अनुसार ही जांच और आख्या प्रक्रिया में है। हालांकि, शिकायतकर्ता के आरोपों ने विभाग की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Vikash Tiwari
Author: Vikash Tiwari

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