वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) परिसर में वामपंथी छात्र संगठन ‘आइसा’ (AISA) के एक कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में बहस तेज हो गई है।
रिपोर्ट अजित शर्मा
जंतर-मंतर पर हालिया प्रदर्शनों के बाद सुर्खियों में आईं आइसा की नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने परिसर में आयोजित एक जनसभा के दौरान केंद्र व राज्य सरकार की नीतियों, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर जमकर प्रहार किया।












स्थानीय व राजनीतिक मुद्दों पर सरकार को घेराअपने संबोधन में नेहा बोरा ने उत्तर प्रदेश सरकार की बुलडोजर कार्रवाई और वाराणसी के दालमंडी क्षेत्र में जारी चौड़ीकरण परियोजना पर कड़ा ऐतराज जताया।
इसके साथ ही उन्होंने शहर के रेहड़ी-पटरी और ठेला विक्रेताओं के अधिकारों का मुद्दा उठाते हुए सरकार की आर्थिक व प्रशासनिक नीतियों की आलोचना की।छात्रों के मुद्दों से भटकने के उठे आरोपकार्यक्रम को लेकर परिसर में यह सवाल भी उठने लगा है कि विश्वविद्यालय जैसे शीर्ष शैक्षणिक संस्थान में छात्रों की शिक्षा, हॉस्टल और शोध से जुड़ी समस्याओं पर बात करने के बजाय राजनीतिक बयानबाजी और दलगत मुद्दों को प्राथमिकता दी गई।प्रोफेसरों की मौजूदगी बनी चर्चा का विषयसभा में बीएचयू के कई वर्तमान एवं सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्राध्यापकों की मौजूदगी भी देखने को मिली। कार्यक्रम के अंत में ‘लाल सलाम’ और वामपंथी नारों की गूंज के बीच अब इस पूरे घटनाक्रम को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में वैचारिक खींचतान और तेज होने की संभावना है।











