राम मंदिर घोटाला: करोड़ों के चढ़ावे में सेंध और निर्माण में 40% कमीशन का आरोप, SIT जांच तेज
अयोध्या के राम मंदिर में भक्तों की आस्था के साथ बड़े खिलवाड़ का मामला सामने आया है। मंदिर के चढ़ावे और दान में मिली कीमती वस्तुओं की चोरी को लेकर इस समय मैराथन जांच चल रही है। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता से 15 दिनों तक धैर्य बनाए रखने की अपील की है।
इस पूरे मामले की कमान तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) के हाथों में है, जो पिछले छह दिनों से लगातार मंदिर के पदाधिकारियों से पूछताछ कर रही है।
‘चांदी गल चुकी है, भूल जाओ’— मुख्य आरोपी टीनू यादव पर गंभीर आरोप
इस पूरे घोटाले के केंद्र में राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के करीबी सहयोगी राम शंकर यादव उर्फ टीनू यादव का नाम सामने आ रहा है। टीनू यादव पर दानपात्र से करोड़ों रुपये के गबन का आरोप है और उनकी गिरफ्तारी कभी भी हो सकती है। (इस मामले में एक अन्य आरोपी लवकुश मिश्रा पहले से ही SIT की हिरासत में है)।
टीनू यादव की संलिप्तता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जब एक श्रद्धालु ने अपने दिए गए दान के बारे में पूछा, तो टीनू ने बेहद गैर-जिम्मेदाराना जवाब देते हुए कहा:
“जो चांदी दी थी, वो गला दी गई है… अब उसे भूल जाओ।”
आस्था को ठेस: नौ रत्नों का हार और चरण पादुकाएं गायब
जौनपुर के बड़े कारोबारी अजय विश्वकर्मा ने रामलला के चरणों में आस्था जताते हुए चांदी की चरण पादुकाएं और नौ रत्नों से जड़ा एक बेशकीमती हार अर्पित किया था। हैरान करने वाली बात यह है कि:
- पीड़ित परिवार को आज तक इस बहुमूल्य चढ़ावे की कोई आधिकारिक रसीद नहीं दी गई।
- वर्तमान में यह हार और चरण पादुकाएं दोनों ही मंदिर के रिकॉर्ड या लॉकर से गायब हैं।
- SIT लगातार इन कीमती आभूषणों को ढूंढने का प्रयास कर रही है, लेकिन अब तक इनका कोई सुराग नहीं मिला है।
अनिल मिश्रा से 3 घंटे की पूछताछ, सामने आईं बड़ी खामियां
ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा से SIT ने करीब तीन घंटे तक कड़ी पूछताछ की। जांच के दौरान मंदिर के प्रबंधन को लेकर बेहद चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं:
- नियमों की अनदेखी: मंदिर के भीतर किसी भी प्रकार के स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का पालन नहीं किया जा रहा था।
- मौखिक आदेशों का खेल: कर्मचारियों को लिखित रूप में कोई आधिकारिक जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई थी; पूरा काम सिर्फ मौखिक निर्देशों के भरोसे चल रहा था, जिससे हेराफेरी की गुंजाइश बढ़ गई।
पूर्व इंजीनियर का बड़ा दावा: “निर्माण कार्य में लिया गया 40% कमीशन”
चढ़ावे की चोरी के बीच, मंदिर निर्माण से जुड़े रहे पूर्व इंजीनियर दीनानाथ वर्मा ने एक और विस्फोटक आरोप लगाकर खलबली मचा दी है।
दीनानाथ वर्मा का कहना है कि वित्तीय गड़बड़ियों का यह खेल नया नहीं है, बल्कि यह मंदिर निर्माण की शुरुआत से ही चल रहा है। उन्होंने सीधे तौर पर अनिल मिश्रा को घेरते हुए दावा किया कि वित्तीय मामलों के प्रभारी होने के नाते, अनिल मिश्रा ने मंदिर निर्माण के हर ठेके और काम में कथित तौर पर 40% तक की भारी-भरकम कमीशनखोरी की है।
फिलहाल, SIT इन तमाम आरोपों की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है और आने वाले दिनों में अयोध्या से जुड़े कई बड़े चेहरों पर कानून का शिकंजा कसना तय माना जा रहा है।









