मिर्जापुर: स्वास्थ्य विभाग के नोटिस कागजों तक सीमित! दो दर्जन से अधिक अवैध अस्पताल, पैथोलॉजी और क्लीनिक धड़ल्ले से जारी
- स्वास्थ्य विभाग की सुस्ती से फल-फूल रहा अवैध चिकित्सा का कारोबार, मरीजों की जान से हो रहा खिलवाड़
- महज नोटिस देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर रहा मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय
मिर्जापुर: जिले में स्वास्थ्य विभाग की लचर कार्यशैली और ढुलमुल रवैये के कारण झोलाछाप और अवैध चिकित्सा संचालकों के हौसले बुलंद हैं। हालत यह है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा मानकविहीन और अवैध रूप से संचालित दो दर्जन से अधिक चिकित्सालयों, पैथोलॉजी और क्लीनिकों को नोटिस थमाए जाने के बावजूद अभी तक उन्हें सील नहीं किया गया है। नतीजा यह है कि ये अवैध सेंटर बिना किसी खौफ के धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं और सीधे तौर पर आम जनता की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
महज कागजी कार्रवाई बनकर रह गई नोटिस
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, कुछ समय पहले स्वास्थ्य विभाग और सीएमओ कार्यालय की टीम ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों में औचक छापेमारी कर अवैध रूप से चल रहे अस्पतालों और पैथोलॉजी सेंटरों की सूची तैयार की थी। विभाग ने इनमें से करीब दो दर्जन संस्थानों को नोटिस जारी कर मानक पूरे न करने पर कड़ी कार्रवाई और सीलिंग की चेतावनी दी थी।
लेकिन विडंबना यह है कि हफ्तो और महीनों बीत जाने के बाद भी ये नोटिस सिर्फ कागजी खानापूर्ति साबित हुए हैं। धरातल पर विभाग ने इन पर ताला जड़ने की जहमत नहीं उठाई। यही वजह है कि नोटिस पाने वाले ये नर्सिंग होम और पैथोलॉजी आज भी पहले की तरह पूरी क्षमता के साथ अवैध संचालन कर रहे हैं।
जिंदगी से खिलवाड़, जिम्मेदारों की चुप्पी
इन अवैध क्लीनिकों और पैथोलॉजी सेंटरों पर न तो कोई योग्य चिकित्सक होता है और न ही जीवन रक्षक उपकरणों का कोई पुख्ता इंतजाम। इसके बावजूद यहाँ मरीजों के स्वास्थ्य और ऑपरेशन के नाम पर मोटी रकम वसूली जा रही है। गलत इलाज और फर्जी रिपोर्ट के कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी कई बड़े सवाल खड़े करती है।
क्या विभाग किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है? या फिर इन अवैध संचालकों और स्वास्थ्य विभाग के कुछ नुमाइंदों के बीच कोई अंदरूनी सांठगांठ चल रही है, जिसके चलते कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है?
जनता में आक्रोश, उठ रही बड़ी कार्रवाई की मांग
जिले के प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने स्वास्थ्य विभाग की इस कार्यशैली पर गहरा रोष व्यक्त किया है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इन अवैध संस्थानों को सील नहीं किया गया, तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
अब देखना यह होगा कि इस खुलासे के बाद जिला प्रशासन और जिलाधिकारी इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए सुस्त पड़े स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर क्या कार्रवाई करते हैं और कब तक इन अवैध अस्पतालों पर ताले लटकते हैं।












