ओपीडी समय के दौरान दोपहर 12 बजे ही डॉक्टर अपनी कुर्सी से नदारद
मिर्जापुर: नगर स्थित भैरव नेत्र चिकित्सालय में शुक्रवार को उस समय मरीजों को भारी दुश्वारियों का सामना करना पड़ा, जब ओपीडी समय के दौरान दोपहर 12 बजे ही डॉक्टर अपनी कुर्सी से नदारद हो गए। दूर-दराज के इलाकों से आंखों का इलाज कराने पहुंचे दर्जनों मरीज डॉक्टर का घंटों इंतजार करने के बाद बैरंग लौटने को मजबूर हुए।
क्या है पूरा मामला?
अस्पताल परिसर में आंख दिखाने पहुंचे मरीजों के अनुसार, वे सुबह से ही कतार में लगकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। लेकिन दोपहर लगभग 12 बजते ही ओपीडी कक्ष से डॉक्टर गायब हो गए। डॉक्टर के कक्ष में न होने से पर्चा बनवा चुके वृद्ध, महिलाएं और दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से आए मरीज परेशान घूमते नजर आए।
मरीजों का छलका दर्द
अस्पताल में मौजूद मरीजों ने बताया:
- घंटों इंतजार: पर्चा कटाने और कतार में खड़े रहने के बावजूद बिना इलाज कराए वापस जाना पड़ा।
- निजी क्लिनिकों का सहारा: मजबूरी में कई मरीजों को भारी फीस देकर निजी नेत्र क्लिनिकों का रुख करना पड़ा।
- प्रशासनिक उपेक्षा: डॉक्टरों के समय से पहले चले जाने पर अस्पताल प्रशासन की तरफ से कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई।
उठ रहे गंभीर सवाल
स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के बड़े-बड़े दावों के बीच इस तरह की लापरवाही सामने आना व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ड्यूटी समय में डॉक्टरों की अनुपस्थिति के कारण सरकारी अस्पतालों से मरीजों का भरोसा उठ रहा है।
ओपीडी समय के दौरान दोपहर 12 बजे ही डॉक्टर अपनी कुर्सी से नदारद
मिर्जापुर: नगर स्थित भैरव नेत्र चिकित्सालय में शुक्रवार को उस समय मरीजों को भारी दुश्वारियों का सामना करना पड़ा, जब ओपीडी समय के दौरान दोपहर 12 बजे ही डॉक्टर अपनी कुर्सी से नदारद हो गए। दूर-दराज के इलाकों से आंखों का इलाज कराने पहुंचे दर्जनों मरीज डॉक्टर का घंटों इंतजार करने के बाद बैरंग लौटने को मजबूर हुए।
क्या है पूरा मामला?
अस्पताल परिसर में आंख दिखाने पहुंचे मरीजों के अनुसार, वे सुबह से ही कतार में लगकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। लेकिन दोपहर लगभग 12 बजते ही ओपीडी कक्ष से डॉक्टर गायब हो गए। डॉक्टर के कक्ष में न होने से पर्चा बनवा चुके वृद्ध, महिलाएं और दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से आए मरीज परेशान घूमते नजर आए।
मरीजों का छलका दर्द
अस्पताल में मौजूद मरीजों ने बताया:
- घंटों इंतजार: पर्चा कटाने और कतार में खड़े रहने के बावजूद बिना इलाज कराए वापस जाना पड़ा।
- निजी क्लिनिकों का सहारा: मजबूरी में कई मरीजों को भारी फीस देकर निजी नेत्र क्लिनिकों का रुख करना पड़ा।
- प्रशासनिक उपेक्षा: डॉक्टरों के समय से पहले चले जाने पर अस्पताल प्रशासन की तरफ से कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई।
उठ रहे गंभीर सवाल
स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के बड़े-बड़े दावों के बीच इस तरह की लापरवाही सामने आना व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ड्यूटी समय में डॉक्टरों की अनुपस्थिति के कारण सरकारी अस्पतालों से मरीजों का भरोसा उठ रहा है।
मांग: पीड़ित मरीजों और स्थानीय नागरिकों ने जिलाधिकारी एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) से मामले का संज्ञान लेकर जांच कराने और दोषी डॉक्टर के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।मांग: पीड़ित मरीजों और स्थानीय नागरिकों ने जिलाधिकारी एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) से मामले का संज्ञान लेकर जांच कराने और दोषी डॉक्टर के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।











