🎶 मिर्ज़ापुर: बड़ी माता मंदिर श्रृंगार पर शास्त्रीय संगीत और कथक की भव्य प्रस्तुति
रिपोर्ट विकास तिवारी
💃मिर्ज़ापुर। नगर के मध्य स्थित बड़ी माता मंदिर में चल रहे चार दिवसीय श्रृंगार कार्यक्रम के दूसरे दिन शास्त्रीय संगीत और कथक नृत्य का भव्य आयोजन किया गया, जिसने पूरे वातावरण को कला और भक्ति से सराबोर कर दिया। कार्यक्रम में काशी के महान कलाकारों ने अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुति से दर्शकों को भावविभोर कर दिया। आयोजन की शुरुआत में स्थानीय और विशिष्ट अतिथियों को सम्मानित भी किया गया।कार्यक्रम को तीन मुख्य चरणों में संपन्न किया गया: गायन, वादन, और नृत्य।🎤 प्रथम चरण:
गायन की मधुरताकार्यक्रम की पहली प्रस्तुति ठुमरी सम्राट पं० महादेव प्रसाद मिश्रा की सुपुत्री श्रीमती मीना मिश्रा ने दी। उन्होंने अपनी सुमधुर आवाज़ में राग मालकौंस में ‘ख्याल काहे हम सँग किन्ही’ और एक शानदार तराना प्रस्तुत किया। इसके बाद, उन्होंने दादरा ‘जमुना जल भरने चलो रे’ और ‘मन गंगा जमुना जय जय भवानी’ से समां बांध दिया। उनके साथ हारमोनियम पर श्री गौरव मिश्र और तबले पर श्री देव नारायण मिश्रा ने कुशल संगत की।
🥁 द्वितीय चरण: तबला-पखावज की युगल बंदीदूसरे चरण में वादन की मनमोहक प्रस्तुति हुई। यह प्रस्तुति पद्म विभूषण पं० किशन महाराज के पुत्र पं० पूरन महाराज जी और उनकी सुपुत्री कु० अवन्तिका महाराज की रही। इस पिता-पुत्री की जोड़ी ने ताल तीनताल में तबला-पखावज की अद्भुत युगल बंदी प्रस्तुत की। उन्होंने बनारस घराने की विशिष्ट वादन शैली में उठान, टुकड़ा, प्रण, और तिहाई बजाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस चरण में हारमोनियम पर ताल शिरोमणि पं० कुमार लाल मिश्र के सुपुत्र श्री गौरव मिश्र जी ने संगत की।
💃 तृतीय चरण: कथक का मनोहारी नृत्यअंतिम और तीसरा चरण नृत्य का रहा। कु० माण्डवी सिंह और कु० शाम्भवी सेठ ने कथक नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति दी। उन्होंने अपनी प्रस्तुति का आरंभ देवी स्तुति और शिव वन्दना ‘डमरू पाणी व शूल पाणी’ से किया। इसके बाद उन्होंने पारंपरिक कत्थक नृत्य की विभिन्न शैलियों का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने ‘मै आज देख आनंद रूप भवानी’ और ‘जय जय भवानी दुर्गे रानी’ गीत पर भाव नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को भक्तिभाव से भर दिया। नृत्य में गायन पर श्री गौरव मिश्रा जी, तबले पर श्री देव नारायण मिश्रा, और पखावज पर कु० अवन्तिका महाराज ने अत्यन्त कुशल संगत की।
🌟 सम्मान और वातावरणकार्यक्रम का संचालन कर रहे विन्ध्यवासिनी प्रसाद केसरवानी ने पहले ही यह भविष्यवाणी कर दी थी कि इस कार्यक्रम की सुखद अनुभूति लंबे दिनों तक रहेगी, जिसे कलाकारों ने सच कर दिखाया। कार्यक्रम के बीच-बीच में लगे माँ के जयकारों से पूरा वातावरण अत्यंत जागृत और भक्तिमय हो उठा था।कार्यक्रम में काशी से आए अतिथियों सहित स्थानीय स्तर के कई मानिंद लोगों, जिनमें पं० रामकृष्ण द्विवेदी, पं० राजपति ओझा, पं० ओमप्रकाश मिश्र, अज्जू बाजपेयी, उमानाथ केसरवानी, बच्चा लाल काँस्यकार और कमलेश पण्डा शामिल थे, को उत्तरीय भेंट कर सम्मानित किया गया।धन्यवाद ज्ञापन श्रीश श्रीवास्तव ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में नीतू सेठ, श्यामू चौरसिया, नंदू सेठ, गोलू सेठ, नीरज मिश्र, आनन्द विश्वकर्मा इत्यादि कार्यकर्ताओं ने प्रमुख रूप से व्यवस्था संभाली।










