चन्दौली (उत्तर प्रदेश): कहते हैं ‘चिराग तले अंधेरा’ होता है, लेकिन चन्दौली के अलीनगर में तो अंधेरा नहीं, बल्कि कानून की धज्जियां उड़ाते हुए खाकी के इकबाल का जनाजा निकाला जा रहा है। जिस अलीनगर सीओ (CO) कार्यालय से इलाके में शांति और कानून व्यवस्था का दम भरा जाता है, उसी दफ्तर की दीवार से चंद कदमों की दूरी पर अवैध गांजे का काला कारोबार धड़ल्ले से फल-फूल रहा है।
भांग की दुकान या नशे का ‘हेडक्वार्टर’?
अलीनगर में स्थित भांग की एक दुकान इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। चर्चा भांग की नहीं, बल्कि उस ‘जहर’ की है जो यहाँ से गुपचुप तरीके से बेचा जा रहा है। सूत्रों की मानें तो इस दुकान की आड़ में अवैध गांजे की मंडी सजती है। नशे के सौदागर इतने बेखौफ हैं कि उन्हें न तो पुलिस का डर है और न ही कानून का शिकंजा।
साहब की ‘खामोशी’ पर उठ रहे सुलगते सवाल
सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि यह अवैध धंधा सीओ साहब के दफ्तर के बिल्कुल करीब हो रहा है। ऐसे में जनता के बीच कुछ कड़वे सवाल तैर रहे हैं:
क्या चन्दौली पुलिस इतनी ‘अंधी’ हो गई है कि उसे अपने घर के बाहर का अपराध नहीं दिखता?
क्या सीओ साहब की नाक के नीचे चल रहे इस खेल में विभाग के ही कुछ ‘वर्दी वाले जयचंद’ शामिल हैं?
क्या पुलिस का खौफ अपराधियों के मन से पूरी तरह खत्म हो चुका है, या फिर ‘महीने की सेटिंग’ ने खाकी की जुबान बंद कर दी है?
”वर्दी पर दाग है यह खामोशी!”
चंद रुपयों के लालच में युवाओं की रगों में जहर घोलने वाले इन सौदागरों को किसका संरक्षण प्राप्त है? अलीनगर पुलिस की यह ‘बेखबरी’ महकमे की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है।



दहशत में जनता, बेखौफ माफिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि यहाँ दिन-भर संदिग्ध लोगों का जमावड़ा लगा रहता है, लेकिन पुलिस की पेट्रोलिंग गाड़ियाँ यहाँ से ‘आंखें मूंदकर’ गुजर जाती हैं। यह स्थिति तब है जब सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने नशे के सौदागरों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपना रखी है। अलीनगर में तो ऐसा लगता है जैसे माफियाओं ने अपना खुद का ‘समानांतर प्रशासन’ खोल रखा है।
कप्तान साहब! कब टूटेगी कुंभकर्णी नींद?
अब देखना यह है कि इस खबर के बाद चन्दौली पुलिस के आला अधिकारी अपनी कुंभकर्णी नींद से जागते हैं या फिर अलीनगर की यह ‘नशे की दुकान’ इसी तरह पुलिस के इकबाल को ठेंगा दिखाती रहेगी।










