📰 जापान में मुस्लिम समुदाय के लिए दफ़न की ज़मीन पर संकट: सरकार ने शवों को मूल देश भेजने को कहाजापान में रह रहे मुस्लिम समुदाय के लिए एक बड़ी ख़बर सामने आई है। देश की सरकार ने मुसलमानों को दफ़नाने के लिए और ज़मीन देने से साफ इनकार कर दिया है।
सरकार का यह रुख़ प्रवासी और जापानी नागरिकता प्राप्त कर चुके, दोनों तरह के मुस्लिमों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
🇯🇵 ज़मीन की कमी बनी मुख्य वजह जापान सरकार ने स्पष्ट किया है कि मुस्लिम शवों को उनके मूल देशों में ले जाकर दफ़नाया जाए। इस कड़े फ़ैसले के पीछे दो मुख्य कारण बताए जा रहे हैं:बढ़ती आबादी और ज़मीन की कमी: जापान में अब करीब 2 लाख मुस्लिम आबादी हो गई है। जापान के शहरी क्षेत्रों में ज़मीन की भारी कमी है, जिसके कारण इस्लाम के रीति-रिवाजों के अनुरूप बड़े कब्रिस्तान बनाना सरकार के लिए मुश्किल हो रहा है।
स्थानीय धार्मिक परंपराएं: जापान में मुख्य रूप से बौद्ध और शिंटो धर्म का प्रभाव है। देश में 99% से अधिक अंतिम संस्कार शवदाह (cremation) के माध्यम से किए जाते हैं। सरकार का कहना है कि वे इस मामले में अपनी पुरानी, स्पष्ट नीति पर कायम हैं।
⚰️ इस्लाम और अंतिम संस्कार का टकराव
इस्लामी परंपरा में शवों को दफ़नाने (burial) का ही रिवाज है, जबकि जापान की मांग इसके विपरीत है। इस स्थिति ने जापान में रहने वाले मुस्लिमों के सामने एक धर्मसंकट पैदा कर दिया है।इस फ़ैसले के लागू होने के बाद, जापान के मुस्लिम समुदाय को अपने मृत परिजनों के अंतिम संस्कार के लिए अवशेषों को वापस उनके मूल देशों में भेजने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।











