दावों की ‘चुनावी ताल’ के बीच बदहाल मिर्जापुर: सड़कें गड्ढों में तब्दील, पानी की किल्लत और जाम से बेहाल जनता
विशेष रिपोर्ट | मिर्जापुर
चुनाव आते ही मिर्जापुर में सियासी सरगर्मी अपने शबाब पर है। सभी राजनीतिक दलों के नेता जनता के बीच जाकर वादों और दावों की नुमाइश कर रहे हैं, मंचों से अपनी-अपनी ताल ठोक रहे हैं। लेकिन चुनावी नारों और भाषणों की इस गूंज के बीच मिर्जापुर के आम नागरिक रोज़मर्रा की बुनियादी समस्याओं के दलदल में धंसते जा रहे हैं। जिले में सड़क, पेयजल और जलनिकासी से लेकर यातायात व्यवस्था की जो स्थिति है, उसने जन-जीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है।
1. सड़कों के गड्ढे या हादसों को न्योता?
जिले की मुख्य सड़कों से लेकर अंदरूनी गलियों तक की स्थिति जर्जर हो चुकी है। बारिश के दिनों में सड़कों पर बने जानलेवा गड्ढे और धंसती सड़कें हादसों का कारण बन रही हैं। निर्माणाधीन सीवर लाइनों और अधूरे विकास कार्यों के चलते राहगीरों का पैदल चलना भी दूभर हो चुका है। कई इलाकों में उखड़ी हुई गिट्टियों और गड्ढों के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं।
2. पानी का संकट और नालियों का उफान
“जल ही जीवन है” का नारा मिर्जापुर की ज़मीनी हकीकत के आगे दम तोड़ता नज़र आता है। एक तरफ जहां ग्रामीण व दूर-दराज के इलाकों में पेयजल का घोर संकट बना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ शहरी व कसबों के इलाकों में जलनिकासी की समुचित व्यवस्था न होने से जलजमाव की विकराल समस्या खड़ी हो गई है। नालियों की नियमित सफाई न होने के कारण हल्का सा पानी बरसते ही सड़कें तालाब बन जाती हैं और गंदा पानी लोगों के घरों तक में प्रवेश कर जाता है।
3. घंटों ट्रैफिक जाम में दम तोड़ती जिंदगी
मिर्जापुर-प्रयागराज मार्ग हो या शहर के अंदरूनी चौराहा/मार्ग, ट्रैफिक जाम की समस्या नासूर बन चुकी है। सड़कों पर अतिक्रमण, अवैध पार्किंग और यातायात प्रबंधन की नाकामी के चलते रोजाना आम नागरिकों को घंटों जाम में जूझना पड़ता है। स्कूल बसें, एम्बुलेंस और दफ्तर जाने वाले लोग हर दिन इस अव्यवस्था की मार झेलने को मजबूर हैं।
4. शिकायतों के बावजूद निस्तारण ‘शून्य’
स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे कई बार प्रशासन और जन-प्रतिनिधियों को शिकायती पत्र दे चुके हैं, लेकिन आज तक किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सका। अधिकारियों के दावों और सरकारी आश्वासनों की फाइलें दफ्तरों में धूल फांक रही हैं।
स्थानीय नागरिक की जुबानी: “नेता जी लोग चुनाव आते ही वोट मांगने आ जाते हैं और बड़े-बड़े वादे करते हैं। चुनाव खत्म होते ही वे गायब हो जाते हैं। सड़क पर पानी भरा है, नालियां ओवरफ्लो हैं और घंटों जाम में फंसना पड़ता है। लेकिन हमारी सुध लेने वाला कोई नहीं है।”
जन-सवाल: कब जागेगा प्रशासन और जनप्रतिनिधि?
जब जिले की जनता मूलभूत सुविधाओं के अभाव में नारकीय जीवन जीने को मजबूर है, तब ऐसे में राजनीतिक दलों की यह ‘ताल ठोकना’ सिर्फ छलावा प्रतीत होता है। जनता का सीधा सवाल है कि क्या इस बार भी चुनाव केवल कागजी वादों पर लड़ा जाएगा या मिर्जापुर की सड़कों, पानी और ट्रैफिक की बदहाल स्थिति में कोई सुधार देखने को मिलेगा?











