कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जहां पुलिस की कथित लापरवाही ने एक हंसते-खेलते परिवार को तबाह कर दिया। ग्वालटोली थाना क्षेत्र में एक मनचले ने घर में घुसकर एक लाचार और लकवाग्रस्त बुजुर्ग की बेरहमी से हत्या कर दी। चौंकाने वाली बात यह है कि जिस वक्त यह वारदात हुई, मृतक की पत्नी और बेटी थाने में आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने गई थीं।
क्या है पूरी घटना?
मामला खलासी लाइन इलाके का है। परिजनों के अनुसार, इलाके का ही रहने वाला साहिल नाम का युवक पिछले काफी समय से एक 15 वर्षीय नाबालिग किशोरी को परेशान कर रहा था। आरोपी की हरकतों से तंग आकर शनिवार को पीड़िता अपनी मां के साथ ग्वालटोली थाने शिकायत करने पहुंची थी।
आरोप है कि जैसे ही साहिल को पता चला कि परिवार पुलिस के पास गया है, उसने घर में अकेले मौजूद बुजुर्ग पिता पर हमला बोल दिया। मृतक पिछले 5 साल से पैरालिसिस (लकवा) से जूझ रहे थे और चलने-फिरने में असमर्थ थे। आरोपी ने बिस्तर पर पड़े बेबस बुजुर्ग के सिर पर लोहे की भारी कढ़ाई से कई वार किए, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
अस्पताल पहुंचने से पहले ही थमी सांसें
जब मां-बेटी थाने से वापस लौटीं, तो घर का मंजर देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। बुजुर्ग खून से लथपथ हालत में पड़े थे। आनन-फानन में उन्हें हैलट अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पीड़िता की मां का रो-रोकर बुरा हाल है; उनका कहना है कि अगर पुलिस ने पहले ही उनकी शिकायतों पर गौर किया होता, तो आज उनके पति जिंदा होते।
पुलिस की कार्रवाई: चौकी इंचार्ज सस्पेंड
इस जघन्य हत्याकांड के बाद इलाके में भारी तनाव व्याप्त है। मामले में पुलिस की कार्यशैली पर उठते सवालों के बीच विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। लापरवाही बरतने के आरोप में संबंधित चौकी इंचार्ज को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
पुलिस प्रशासन का पक्ष:
- आरोपी साहिल के खिलाफ हत्या और छेड़खानी समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
- फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।
- स्थानीय अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही आरोपी सलाखों के पीछे होगा।
उठते गंभीर सवाल
यह घटना महिला सुरक्षा के दावों पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है। जब पीड़ित परिवार सालों से प्रताड़ित हो रहा था, तो पुलिस ने समय रहते ठोस कदम क्यों नहीं उठाए? क्या प्रशासन की सक्रियता केवल किसी अनहोनी के बाद ‘सस्पेंशन’ तक ही सीमित है?










