वाराणसी में कथित जुआ अड्डों के संचालन का आरोप, पुलिस आयुक्त से निष्पक्ष जांच की मांग
दीपक यादव ‘कल्लू’ समेत कई लोगों के नाम शिकायत में शामिल; शिवम पाण्डेय ने रोहित कृष्ण यादव की ओर से सौंपा ज्ञापनजैतपुरा, आदमपुर और कैंट थाना क्षेत्रों में कथित जुआ संचालन का मामला उठा; पुलिस और एसओजी-2 की भूमिका की जांच कराने की मांगवाराणसी, 17 अक्टूबर। वाराणसी के जैतपुरा, आदमपुर और कैंट थाना क्षेत्रों में कथित जुआ अड्डों के संचालन को लेकर पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। अधिवक्ता शिवम पाण्डेय ने अधिवक्ता रोहित कृष्ण यादव की ओर से पुलिस आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर कथित जुआ अड्डों की जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि संबंधित क्षेत्रों में बड़े स्तर पर जुआ संचालन और भारी धनराशि के लेन-देन की शिकायतें हैं। इसमें स्थानीय पुलिस और एसओजी-2 की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराने की मांग की है।दीपक यादव ‘कल्लू’ समेत कई नामों का उल्लेखज्ञापन में कथित जुआ संचालन से जुड़े प्रमुख लोगों के रूप में दीपक यादव उर्फ कल्लू, अन्नू यादव, निक्की जायसवाल, किशन महाराज, राजू, विजय सोनपापड़ी, शिवम चतुर्वेदी और दिनेश प्रजापति समेत अन्य लोगों के नामों का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन व्यक्तियों की कथित भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। आरोपों की सत्यता जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी।पुलिस और एसओजी-2 की भूमिका की जांच की मांगज्ञापन में कहा गया है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच किसी स्वतंत्र एवं वरिष्ठ अधिकारी से कराई जाए। कथित जुआ अड्डों के संचालकों, आयोजकों और वित्तीय लेन-देन से जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल की जाए। यदि जांच में किसी पुलिसकर्मी या अधिकारी की संलिप्तता अथवा लापरवाही प्रमाणित होती है, तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाए।अधिवक्ताओं के नाम भी शामिलइस मामले में उपलब्ध कराई गई सूची के अनुसार, अधिवक्ता रोहित कृष्ण यादव, शिवम पाण्डेय, उमराव सिंह, विनय पटेल, वत्स विनायक मिश्रा, अमित तिवारी, धीरेंद्र श्रीवास्तव, पंकज उपाध्याय, वरुण पंडित, विनय त्रिपाठी, विकास सिंह और जयप्रकाश पाण्डेय के नाम भी शामिल हैं।अब इस मामले में पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर निगाहें टिकी हैं। शिकायत में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। संबंधित व्यक्तियों का पक्ष और पुलिस प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने पर मामले की तस्वीर और साफ हो सकेगी।













