वाराणसी। प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के बरईपुर में सिस्टम की संवेदनहीनता और लापरवाही की पराकाष्ठा देखने को मिल रही है।
रिपोर्ट अजित शर्मा
पूरा इलाका गंदे और बदबूदार पानी में डूब चुका है, लेकिन जनता की चीख-पुकार सुनने वाला कोई नहीं है। हालत यह है कि इंसान और जहरीले जीव-जंतु एक ही घर में रहने को मजबूर हैं, और प्रशासनिक अमला चैन की नींद सो रहा है।
घरों में घुट रही सांसें, शौचालयों पर ‘नागदेव’ का डेरागंदा पानी कमरों और रसोई तक सड़ रहा है। पानी के साथ घरों में घुसे सांप और बिच्छू सीधे शौचालयों और बिस्तरों तक पहुंच रहे हैं। जान बचाने के खौफ से लोगों ने घरों के शौचालय बंद कर दिए हैं। सोचिए, इस डिजिटल भारत में बरईपुर की माताओं-बहनों और मासूम बच्चों को शौच के लिए 1 किलोमीटर दूर तक जान जोखिम में डालकर जाना पड़ रहा है।




PMO से लेकर IGRS तक सब हवा-हवाई, MLC से पार्षद तक सिर्फ ‘झूठे वादे’कागजी दावों और जनसुनवाई के विज्ञापनों की असलियत बरईपुर की सड़ांध मारती गलियों में तैर रही है:
चेतावनी:
कागजी रिपोर्टिंग बंद करो, वर्ना बरईपुर की जनता करेगी उग्र आंदोलन
स्थानीय पीड़ित—श्यामदुलारी देवी, लालजी पाल, कृष्णा देवी, सोनू पाल, भोला पाल, उर्मिला देवी, अनिल पाल, पंचम पाल, अंकित पाल और अंजलि पाल का सब्र अब पूरी तरह टूट चुका है।
जनता का सीधा सवाल है—क्या किसी मासूम की जान सांप के काटने या संक्रामक बीमारी से जाने के बाद ही अफसरों की नींद टूटेगी?
अगर 24 घंटे के भीतर पंप लगाकर पानी की निकासी और क्षेत्र में फॉगिंग व सफाई का काम शुरू नहीं हुआ, तो पूरा बरईपुर सड़क पर उतरेगा और इस प्रशासनिक नाकामी का घेराव करेगा।











