चकिया (चंदौली): उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में कानून का इकबाल खत्म हो चुका है और खाकी का खौफ ‘शून्य’ हो गया है।
रिपोर्टर राज कुमार सोनकर
चकिया के शिकारगंज इलाके में अवैध खनन की कवरेज करने पहुंचे एक निडर पत्रकार पर खनन माफियाओं ने सरेआम जानलेवा हमला कर दिया। यह हमला केवल एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की गर्दन पर माफियाओं के खूनी पंजे का निशान है।
घटना का खौफनाक मंजर
अवैध खनन के काले कारोबार को बेनकाब करने पहुंचे पत्रकार पर माफियाओं ने ‘गैंग’ बनाकर हमला किया। उन्हें तब तक बेरहमी से पीटा गया जब तक वे लहूलुहान होकर जमीन पर नहीं गिर पड़े। सिर पर किए गए वार इतने गहरे थे कि पत्रकार की हालत मरणासन्न हो गई। फिलहाल, वे जिंदगी और मौत के बीच बीएचयू (BHU) ट्रॉमा सेंटर में जंग लड़ रहे हैं।
प्रशासन पर चुभते सवाल:
कुंभकर्णी नींद में पुलिस: सूचना देने के एक घंटे बाद पुलिस और वन विभाग का मौके पर पहुंचना क्या माफियाओं को भागने का ‘सुरक्षित रास्ता’ देना था?



माफियाओं का मनोबल: चकिया क्षेत्र में आखिर किसके संरक्षण में अवैध खनन का नंगा नाच चल रहा है कि माफिया अब पत्रकारों की जान लेने से भी नहीं कतरा रहे?
ठेंगा दिखाते अपराधी: जब रक्षक ही मौन हों, तो अपराधियों के हौसले बुलंद होना लाजिमी है। क्या चंदौली पुलिस ने जिले को माफियाओं के हवाले कर दिया है?
आक्रोश की आग
घटना के बाद जिला संयुक्त चिकित्सालय से लेकर कोतवाली तक पत्रकारों और स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। परिजनों ने नामजद तहरीर दी है, लेकिन सवाल वही है— क्या पुलिस सिर्फ कागजी कार्रवाई करेगी या इन ‘नरभक्षी’ माफियाओं के साम्राज्य को ध्वस्त करने का साहस दिखाएगी?









