वाराणसी। प्रतिबंधित कोडीन युक्त कफ सिरप के अवैध धंधे और नशे के काले कारोबार के खिलाफ वाराणसी की कोतवाली पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने शुक्रवार को अंतरराज्यीय सिंडिकेट से जुड़े दो रसूखदार दवा व्यापारियों को गिरफ्तार किया है। जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने इस अवैध धंधे से करोड़ों की संपत्ति और आलीशान बंगले खड़े कर लिए थे।
शानदार बंगले देख पुलिस भी रह गई दंग
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान धर्मेंद्र अग्रवाल (लोकेश फार्मा) और प्रतीक कुमार (शिल्पी फार्मा) के रूप में हुई है। कोतवाली प्रभारी दयाशंकर सिंह के नेतृत्व में जब टीम प्रतीक कुमार के घर पहुंची, तो वहां का ऐश्वर्य और भव्यता देखकर अधिकारी हैरान रह गए। एक छोटे दवा कारोबारी की इतनी विलासितापूर्ण जीवनशैली ने पुलिस के शक को यकीन में बदल दिया।
करोड़ों का फर्जीवाड़ा और ‘सिंडिकेट’ का खेल
पुलिस जांच के अनुसार, यह पूरा खेल फर्जी कागजों और शेल कंपनियों के दम पर चल रहा था।
अपराध का तरीका: आरोपी झारखंड (रांची) की ‘शैली ट्रेडर्स’ के साथ मिलकर फर्जी जीएसटी चालान और ई-वे बिल तैयार करते थे।
कागजी खेल: कफ सिरप की खरीद-बिक्री सिर्फ कागजों पर दिखाई जाती थी, जबकि माल को सीधे नशे के बाजार में खपा दिया जाता था।
मुनाफा: आरोपियों ने करीब 5.27 करोड़ रुपये का अवैध लाभ कमाया। वे कफ सिरप को दवा के रूप में नहीं, बल्कि नशेड़ियों को 10 गुना महंगे दामों पर बेचते थे।
पूछताछ में कबूला गुनाह
गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे अधिक पैसा कमाने के लालच में इस सिंडिकेट में शामिल हुए थे। उन्होंने बताया कि वे शैली ट्रेडर्स के संचालक भोला प्रसाद और शुभम जायसवाल के संपर्क में थे। जिन फर्मों को माल बेचना दिखाया गया, हकीकत में उनका कोई अस्तित्व ही नहीं था।

इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमापुलिस ने आरोपियों के खिलाफ NDPS एक्ट की धारा 8/21/29 और BNS की विभिन्न धाराओं (धोखाधड़ी और साजिश) के तहत मामला दर्ज किया है। इस कार्रवाई में क्राइम टीम और सर्विलांस सेल की भी अहम भूमिका रही।
पुलिस का अगला कदम:




विभाग अब इन आरोपियों की अवैध रूप से अर्जित अन्य संपत्तियों और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य ‘सफेदपोश’ लोगों की तलाश में जुट गया है।









