मीरजापुर: सीएमओ के कड़े आदेश भी बेअसर, अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों से गायब रहते हैं कर्मचारी
विशेष रिपोर्ट | मीरजापुर
स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और मरीजों को समय पर इलाज मुहैया कराने के लिए भले ही मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) द्वारा लगातार दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हों, लेकिन धरातल पर इसका कोई असर देखने को नहीं मिल रहा है। सीएमओ के स्पष्ट आदेशों और चेतावनियों के बावजूद स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी अपनी आदतों से बाज नहीं आ रहे हैं और ड्यूटी समय से गायब (नदारद) रह रहे हैं।
समय पर नहीं पहुंचते कर्मचारी, मरीज हो रहे परेशान
जिले के प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के साथ-साथ सीएमओ कार्यालय से जुड़े विभिन्न पटलों पर तैनात कई कर्मचारी अक्सर निर्धारित समय पर अनुपस्थित पाए जा रहे हैं। सुबह दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से इलाज कराने आने वाले मरीजों को घंटों तक कर्मचारियों का इंतजार करना पड़ता है। समय पर स्वास्थ्य कर्मी और बाबू न मिलने के कारण पर्चा बनवाने, दवा वितरण और जांच जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए भी लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
आदेशों को ठेंगा दिखा रहे मातहत
हाल ही में सीएमओ द्वारा दिए गए कड़े निर्देशों में कहा गया था कि सभी अधिकारी और कर्मचारी समय से उपस्थित रहें और अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करें। लापरवाही बरतने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी। इसके बावजूद कर्मचारियों का रवैया सुधरने का नाम नहीं ले रहा है। स्थानीय लोगों और मरीजों का आरोप है कि बायोमैट्रिक उपस्थिति या रजिस्टर में हाजिरी को लेकर कोई ठोस निगरानी न होने के कारण यह स्थिति बनी हुई है।
जनता की मांग: औचक निरीक्षण कर हो सख्त कार्रवाई
अस्पतालों में व्याप्त इस अव्यवस्था से क्षेत्र की जनता में भारी आक्रोश है। स्थानीय नागरिकों और समाजसेवियों ने स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि ऐसे लापरवाह और नदारद रहने वाले कर्मचारियों पर लगाम कसने के लिए नियमित रूप से औचक निरीक्षण (सरप्राइज चेकिंग) कराया जाए। साथ ही केवल चेतावनी देने के बजाय अनुपस्थित कर्मचारियों का वेतन काटने और कड़ी विभागीय कार्रवाई करने की जरूरत है ताकि व्यवस्था में सुधार हो सके।








