छतारी में आम के पेड़ों का ‘कत्लेआम’, प्रशासन मौन क्यों?
रिपोर्ट: दीपक चौहान
बुलंदशहर/छतारी। उत्तर प्रदेश सरकार एक ओर करोड़ों पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रही है, वहीं दूसरी ओर बुलंदशहर के थाना छतारी क्षेत्र में हरे-भरे आम के पेड़ों पर बेखौफ आरा चलाया जा रहा है। आरोप है कि छतारी अनाज मंडी के बराबर में बड़े पैमाने पर आम के पेड़ों का अवैध कटान जारी है और जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठा है।स्थानीय लोगों के अनुसार, कटान माफिया दिन-दहाड़े फलदार और हरे-भरे आम के पेड़ों को काटकर ट्रकों में भरकर ले जा रहे हैं। वायरल तस्वीरों और वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि विशालकाय आम के पेड़ों को काटकर लकड़ियों से लदे वाहन खुलेआम सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर बिना किसी अनुमति के इतना बड़ा कटान कैसे हो रहा है?ग्रामीणों का कहना है कि यदि इसी तरह आम के बाग और हरे-भरे पेड़ खत्म होते रहे तो आने वाली पीढ़ियों को केवल कंक्रीट का जंगल ही मिलेगा। एक तरफ सरकार पर्यावरण बचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, दूसरी तरफ कथित लकड़ी माफिया पर्यावरण को उजाड़ने में जुटे हैं।सबसे बड़ा सवाल वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर उठ रहा है। लोगों का आरोप है कि कई दिनों से कटान जारी है, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। यदि कटान अवैध है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं? और यदि अनुमति है तो उसका विवरण सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा?स्थानीय लोगों का दावा है कि कटान से जुड़े व्यक्ति स्वयं को “साकिब छतारी” बताता है और खुलेआम चुनौती देता है कि “जो करना हो कर लो।” यदि यह आरोप सही हैं तो यह कानून व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।प्रदेश में आम के हरे पेड़ों के संरक्षण को लेकर न्यायालयों ने भी समय-समय पर सख्त रुख अपनाया है और बिना वैध अनुमति फलदार पेड़ों की कटाई पर रोक संबंधी निर्देश दिए गए हैं।










