चकिया में किसे डर है सच से? वीडियो हटाने के आरोप से मचा बवाल

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‘खबर हटाओ’ के कथित दबाव का दावा, चंदौली में गरमाई सियासत

रिपोर्ट : राजकुमार सोनकर

चंदौली/चकिया। चकिया स्थित सरकारी अस्पताल से जुड़े कथित चिकित्सा लापरवाही के मामले ने अब नया राजनीतिक और मीडिया रंग ले लिया है। अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाले एक वीडियो के सामने आने के बाद खबर को हटवाने के लिए दबाव बनाए जाने के आरोपों ने पूरे मामले को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यूट्यूबर मयंक ने आरोप लगाया है कि अस्पताल से जुड़े विवादित वीडियो और समाचार को हटाने के लिए उन पर दबाव बनाया गया। मयंक का दावा है कि इस संबंध में हुई पूरी बातचीत की रिकॉर्डिंग उनके पास सुरक्षित है, जिसे जरूरत पड़ने पर संबंधित जांच एजेंसियों को सौंपा जा सकता है।

खबर हटाने के लिए संपर्क किए जाने का आरोप

मयंक का आरोप है कि पत्रकार कार्तिकेय पांडेय ने उनसे संपर्क कर वीडियो हटाने का अनुरोध किया। बातचीत के दौरान संबंधित चिकित्सक से पारिवारिक और व्यक्तिगत संबंध होने की बात कही गई तथा मामले को आगे न बढ़ाने की सलाह दी गई।हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है। वहीं समाचार लिखे जाने तक कार्तिकेय पांडेय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

अस्पताल की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल

पूरा विवाद चकिया सरकारी अस्पताल में कथित चिकित्सा लापरवाही से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि इलाज के दौरान बरती गई लापरवाही के कारण मरीज और उसके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।मामला सार्वजनिक होने के बाद स्थानीय नागरिकों ने भी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और जवाबदेही पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि अस्पताल में किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो इसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

रिकॉर्डिंग और डिजिटल साक्ष्य होने का दावा

यूट्यूबर मयंक का कहना है कि उनके पास बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल साक्ष्य मौजूद हैं। उनका दावा है कि यदि किसी एजेंसी द्वारा जांच कराई जाती है तो वह सभी साक्ष्य उपलब्ध कराने के लिए तैयार हैं।उन्होंने यह भी मांग की है कि रिकॉर्डिंग की तकनीकी एवं फोरेंसिक जांच कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके और यह स्पष्ट हो सके कि बातचीत के दौरान क्या कहा गया था।

प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी निगाहें

मामला तूल पकड़ने के बाद अब जिले भर की निगाहें स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की ओर टिकी हुई हैं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित पक्षों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग तेज हो सकती है। वहीं यदि आरोप निराधार साबित होते हैं तो प्रशासन से पूरे मामले पर स्पष्ट रिपोर्ट जारी करने की अपेक्षा की जा रही है।

यह मामला केवल एक अस्पताल, एक वीडियो या दो व्यक्तियों के बीच विवाद तक सीमित नहीं है। यह सरकारी संस्थानों की जवाबदेही, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, मीडिया की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति के अधिकार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को भी सामने लाता है।अब पूरे जिले की नजर इस बात पर है कि प्रशासन इस मामले की जांच किस दिशा में ले जाता है और आरोपों के पीछे की वास्तविक सच्चाई कब तक सामने आती है।

(नोट: समाचार में लगाए गए आरोप संबंधित पक्षों के दावों पर आधारित हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि होना अभी शेष है।)

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