चेन्नई/न्यूज़ डेस्क: तमिलनाडु की राजनीति इस समय किसी थ्रिलर फिल्म के क्लाइमेक्स की तरह मोड़ ले रही है। थलापति विजय की राजनीतिक पारी शुरू होते ही संवैधानिक जंग छिड़ गई है। ताज़ा विवाद तब खड़ा हुआ जब उपराज्यपाल ने विजय को 118 विधायकों का समर्थन साबित करने की चुनौती दी। इस फैसले ने न केवल जनता को हैरान किया, बल्कि विजय के पुराने आलोचक रहे प्रकाश राज को भी उनके समर्थन में उतरने पर मजबूर कर दिया है।
प्रकाश राज का तीखा प्रहार: ‘यह घिनौना और अस्वीकार्य है’
अक्सर विजय की राजनीतिक एंट्री पर कटाक्ष करने वाले प्रकाश राज इस बार उनके सबसे बड़े ढाल बनकर उभरे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपना गुस्सा जाहिर करते हुए प्रकाश राज ने लिखा:
https://x.com/prakashraaj/status/2052253123805421572?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E2052253123805421572%7Ctwgr%5E6f4635bdd309001b92aaeab766500c369f34db3b%7Ctwcon%5Es1_c10&ref_url=https%3A%2F%2Fwww.indiatv.in%2Fentertainment%2Fbollywood%2Fprakash-raj-gets-irked-after-lieutenant-governor-asks-vijay-to-bring-118-mlas-his-reaction-surfaces-2026-05-07-1216983
“राज्यपाल का यह व्यवहार घिनौना, अस्वीकार्य और असंवैधानिक है। हमारे बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन विजय को जनादेश मिला है। उन्हें सदन के पटल पर अपना दावा पेश करने का अधिकार मिलना चाहिए।”
प्रकाश राज का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने हमेशा ‘फैन-ड्रिवन’ राजनीति की आलोचना की है, लेकिन जब बात लोकतांत्रिक अधिकारों की आई, तो उन्होंने विजय का साथ देना सही समझा।
चेन्नई राजभवन में क्या ‘खेल’ चल रहा है?
तमिलनाडु में सत्ता का समीकरण उलझता जा रहा है। एक तरफ DMK और AIADMK के बीच गठबंधन की अटकलें हैं, तो दूसरी तरफ विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) को रोकने की कोशिशों के आरोप लग रहे हैं।
वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई की पोस्ट को साझा करते हुए प्रकाश राज ने राज्यपाल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। सरदेसाई ने पूछा है कि जब कोई और दल सरकार बनाने का स्पष्ट दावा पेश नहीं कर रहा, तो गोवा से ताल्लुक रखने वाले वरिष्ठ भाजपा नेता और वर्तमान राज्यपाल, विजय को इंतजार क्यों करवा रहे हैं?
पर्दे के ‘दुश्मन’ अब लोकतंत्र के ‘दोस्त’
विजय और प्रकाश राज की जोड़ी ने ‘घिल्ली’ और ‘पोक्किरी’ जैसी फिल्मों में एक-दूसरे के खिलाफ जानदार अभिनय किया है। असल जिंदगी में भी प्रकाश राज ने हमेशा तर्क दिया है कि केवल ‘प्रसिद्धि’ सुशासन के लिए पर्याप्त नहीं है। लेकिन मौजूदा हालात में, प्रकाश राज का मानना है कि राज्यपाल का हस्तक्षेप व्यक्तिगत पसंद-नापसंद से ऊपर उठकर एक निर्वाचित प्रतिनिधि के अधिकारों का हनन है।
क्या होगा विजय का अगला कदम?
सूत्रों की मानें तो थलापति विजय बहुत जल्द राज्यपाल से मुलाकात कर सकते हैं। वे राजभवन जाकर यह स्पष्ट करेंगे कि उनके पास न केवल विजन है, बल्कि सरकार चलाने के लिए आवश्यक समर्थन भी मौजूद है।
निष्कर्ष: लोकतंत्र बनाम पद की गरिमा
तमिलनाडु का यह सियासी संग्राम अब केवल एक मुख्यमंत्री की कुर्सी की लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि यह राज्यपाल के पद की निष्पक्षता पर भी एक बड़ा सवाल बन गया है। प्रकाश राज जैसे मुखर अभिनेताओं का साथ मिलना विजय के लिए एक बड़ी नैतिक जीत है।










