​​”India Samachar 24×7 Big Reveal: भोजपुर में नए प्रभारियों की पहली ही परीक्षा में ‘फेल’ हुई पुलिस! क्या अवैध धंधेबाजों के आगे नतमस्तक है जलीलपुर चौकी/ मुगलसराय पुलिस?

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​”भोजपुर में ‘वर्दी’ का स्वागत अवैध धंधों से! नए चौकी प्रभारी की नाक के नीचे सजी दुकानें, CO ने छापा मारकर सरेआम उतारी पुलिस की इज्जत।”

पड़ाव चंदौली

​जलीलपुर (भोजपुर): पुलिस प्रशासन के दावों की हवा तब निकल गई जब क्षेत्राधिकारी अरुण कुमार सिंह के नेतृत्व में भोजपुर गांव स्थित कंपोजिट शराब दुकान के बगल में चल रही अवैध ‘चिखना’ दुकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की गई। इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया कि स्थानीय चौकी और थाना स्तर पर या तो भारी लापरवाही बरती जा रही है, या फिर अवैध कारोबारियों को ‘खाकी’ का संरक्षण प्राप्त है।

दहशत में दुकानदार, शटर गिराकर भागे ‘दागी’

​सीओ की इस अचानक हुई कार्रवाई से इलाके में हड़कंप मच गया। दर्जनों लोगों को हिरासत में लिया गया है, जबकि कई दुकानदार गिरफ्तारी के डर से दुकानों के शटर गिराकर मौके से फरार हो गए। सवाल यह उठता है कि जब उच्चाधिकारी कार्रवाई कर सकते हैं, तो स्थानीय पुलिस की नजरों से ये अवैध ठिकाने अब तक ओझल कैसे रहे?

पुराने दाग फिर हुए ताजा: आखिर कौन दे रहा शह?

​बता दें कि यह कोई पहली घटना नहीं है। कुछ महीनों पहले भी यहाँ ऐसी ही बड़ी कार्रवाई हुई थी और कई लोगों पर मुकदमे दर्ज किए गए थे। बावजूद इसके, अवैध दुकानों का दोबारा सज जाना पुलिस के इकबाल पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। क्या अपराधियों के मन से कानून का डर खत्म हो चुका है? या फिर कुछ ‘महीने’ की सेटिंग के खेल में जनता की सुरक्षा और शांति को दांव पर लगा दिया गया है?

नए प्रभारी के लिए ‘अग्निपरीक्षा’

वर्तमान में नए प्रभारी के लिए भोजपुर का यह इलाका सिरदर्द बना हुआ है। यहाँ आए दिन होने वाले विवाद और अवैध गतिविधियां कानून-व्यवस्था को चुनौती दे रही हैं। स्थानीय जनता अब सीधे सवाल पूछ रही है:

​क्या चौकी और थाना प्रभारी को इन गतिविधियों की जानकारी नहीं थी?​

अगर जानकारी थी, तो कार्रवाई के लिए क्षेत्राधिकारी का इंतजार क्यों करना पड़ा?​

क्या बार-बार अपराध दोहराने वाले इन दुकानदारों पर अब गैंगस्टर जैसी कठोर कार्रवाई होगी?

​खास नोट:

क्षेत्राधिकारी की इस कार्रवाई ने जहाँ एक ओर जनता में विश्वास जगाया है, वहीं स्थानीय पुलिस की कार्यक्षमता को कटघरे में खड़ा कर दिया है। देखना यह है कि अब थाना प्रभारी इस ‘धब्बे’ को धोने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं या फिर कुछ दिन बाद स्थिति फिर जस की तस हो जाएगी।

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