चकिया के बीकापुर गांव में ग्रामीणों का बड़ा दावा मनरेगा में ‘महाघोटाले’ का आरोप: पांच साल तक असली मजदूर रहे बेरोजगार, कागजों में चलता रहा फर्जी रोजगार!

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

चकिया के बीकापुर गांव में ग्रामीणों का बड़ा दावा—फर्जी मस्टर रोल और कागजी विकास कार्यों के जरिए सरकारी खजाने को करोड़ों की चपत लगाने का आरोप, उच्चस्तरीय जांच की मांग।

चकिया (चंदौली)। केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। चकिया ब्लॉक के बीकापुर गांव में ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पिछले लगभग पांच वर्षों से वास्तविक मजदूरों को रोजगार से वंचित रखा गया, जबकि सरकारी अभिलेखों में कथित रूप से फर्जी नामों पर मस्टर रोल भरकर लाखों रुपये का भुगतान किया जाता रहा।

ग्रामीणों का कहना है कि गांव में कई ऐसे विकास कार्य कागजों पर पूरे दिखाए गए हैं, जिनकी वास्तविक स्थिति मौके पर बिल्कुल अलग है। उनका आरोप है कि फर्जी कार्यों, फर्जी मजदूरों और कागजी खानापूर्ति के सहारे सरकारी धन का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि कई पात्र मजदूर काम की तलाश में भटकते रहे, जबकि कागजों में दूसरे लोगों के नाम से रोजगार दिखाकर सरकारी धन निकाला जाता रहा। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो इसमें जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।

अब यह मामला प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की गोपनीय एवं निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए और सरकारी धन की रिकवरी सुनिश्चित की जाए।

और पढ़ें

[democracy id="1"]
error: Content is protected !!