तिरुवनंतपुरम/नई दिल्ली: केरल की राजनीति में नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहट के बीच अब सबकी निगाहें कांग्रेस आलाकमान पर टिकी हैं। राज्य में मुख्यमंत्री पद के दावेदारों को लेकर सस्पेंस खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को कांग्रेस पर्यवेक्षकों ने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंप दी है, जिसके बाद सत्ता के गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट में किसका पलड़ा भारी?
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस पर्यवेक्षकों ने राज्य के विधायकों के साथ मैराथन बैठकें कीं। एक-एक विधायक से व्यक्तिगत राय लेने के बाद तैयार की गई इस रिपोर्ट में के. सी. वेणुगोपाल का नाम सबसे आगे चल रहा है। बताया जा रहा है कि लगभग 40 से 43 विधायकों ने वेणुगोपाल के नेतृत्व पर भरोसा जताया है।
हालाँकि, वेणुगोपाल के लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी तक का सफर इतना सीधा नहीं है। राहुल गांधी के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार होने के नाते, दिल्ली की राजनीति में उनकी भूमिका बेहद अहम है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या राहुल गांधी उन्हें राज्य की जिम्मेदारी के लिए दिल्ली से मुक्त करेंगे?
रेस में शामिल अन्य दो दिग्गज
यदि वेणुगोपाल के नाम पर सहमति नहीं बनती है, तो पार्टी के पास दो और मजबूत विकल्प मौजूद हैं:
- रमेश चेन्निथला: अनुभवी नेता चेन्निथला के पास प्रशासनिक अनुभव की कमी नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें 20 से अधिक विधायकों का समर्थन प्राप्त है। वे पार्टी के भीतर एक पुराने और विश्वसनीय चेहरे के रूप में देखे जाते हैं।
- वी. डी. सतीशन: वर्तमान में विपक्ष के नेता सतीशन की सबसे बड़ी ताकत UDF के सहयोगी दल हैं। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) और केरल कांग्रेस (जोसेफ) जैसे सहयोगी दलों का मानना है कि सतीशन ने जमीन पर बेहतर काम किया है। सहयोगियों का तर्क है कि मुख्यमंत्री किसी ऐसे व्यक्ति को होना चाहिए जो वर्तमान में विधायक हो।
अब खरगे और राहुल के पाले में गेंद
पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट मिलने के बाद अब अंतिम निर्णय मल्लिकार्जुन खरगे को लेना है। चर्चा है कि पार्टी नेतृत्व क्षेत्रीय समीकरणों और भविष्य के चुनावों को ध्यान में रखते हुए ही किसी नाम पर मुहर लगाएगा। क्या विधायकों की पसंद को प्राथमिकता मिलेगी या गठबंधन सहयोगियों के दबाव में नया समीकरण बनेगा, यह आने वाले कुछ घंटों में साफ हो सकता है।










