नाबालिक को स्कूल जाते समय अगवा करने के आरोपित को जमानत, अदालत ने 50 हजार के बंधपत्र पर दी रिहाई
रिपोर्ट पवन जायसवाल
वाराणसी जिला एवं सत्र न्यायाधीश, वाराणसी की अदालत ने एक नाबालिक छात्रा को घर से स्कूल जाते समय बहला-फुसलाकर अगवा करने के आरोपित को जमानत दे दी है। अदालत ने अभियुक्त को 50 हजार रुपये का एक व्यक्तिगत बंधपत्र और जमानत राशि जमा करने पर रिहा करने का आदेश दिया।मामला 28 मार्च, 2024 का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, वादी की पुत्री उस दिन घर से विद्यालय के लिए निकली थी। आरोप है कि इसी दौरान अभियुक्त ने उसे बहला-फुसलाकर अगवा कर लिया। पीड़िता नाबालिक थी, जिसके बाद परिजनों ने तत्काल पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 137(2) और 87 के तहत मामला पंजीकृत किया। धारा 137(2) गंभीर अपहरण के प्रावधानों से संबंधित है, जबकि धारा 87 अन्य आपराधिक कृत्यों को दर्शाती है।अभियुक्त की ओर से अदालत में पेश युवा अधिवक्ताओं नदीम अहमद, विशाल सेठ और रजत सेठ ने जोरदार बहस करते हुए कहा कि उनका मुवक्किल पूरी तरह निर्दोष और बेगुनाह है। उसने कोई अपराध नहीं किया है। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि अभियोजन पक्ष के आरोप झूठे और निराधार हैं। उन्होंने कहा कि अभियुक्त को फंसाया जा रहा है और उसके विरुद्ध कोई ठोस सबूत नहीं है। साथ ही, अभियुक्त ने न्यायिक हिरासत में समय बिताया है, इसलिए उसे जमानत पर रिहा किया जाए।अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि अभियुक्त के विरुद्ध अभियोजन पक्ष के दावों में प्रथम दृष्टया कुछ खामियां हैं।
न्यायालय ने यह भी देखा कि आरोपित ने अब तक पूछताछ में सहयोग किया है और उसके फरार होने की आशंका नहीं है। ऐसे में अदालत ने अभियुक्त को रिहाई का लाभ देते हुए 50 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और एक समान राशि की जमानत पर रिहा करने का आदेश सुनाया। हालांकि, अदालत ने जमानत की शर्तों में यह भी कहा कि अभियुक्त किसी भी तरह से गवाहों या साक्ष्यों से छेड़छाड़ न करे और मामले की सुनवाई के दौरान नियमित रूप से अदालत में पेश होता रहे।उल्लेखनीय है कि नाबालिक बच्चियों के अपहरण के मामले संवेदनशील होते हैं, लेकिन कानून हर आरोपित को तब तक निर्दोष मानता है जब तक दोष सिद्ध न हो। इस मामले में अभियोजन पक्ष को अब अदालत में अपने आरोपों को साबित करने की चुनौती होगी।फिलहाल अभियुक्त के खिलाफ धारा 137(2) और 87 BNS के तहत मुकदमा जारी है। अगली सुनवाई की तारीख अदालत द्वारा तय की जाएगी। इस बीच वादी पक्ष का कहना है कि वह उच्च न्यायालय में इस आदेश के खिलाफ अपील करने पर विचार कर रहा है। वहीं बचाव पक्ष ने न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि सच्चाई जल्द ही सामने आ जाएगी।









