पत्रकारिता का चोला पहनकर दबाव बनाने का प्रयास? लेडी सिंघम के आगे पस्त हुए स्वघोषित ब्यूरो चीफ।

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चंदौली: एसपी के ‘अल्टीमेटम’ के अगले ही दिन शहाबगंज SHO पर बदसलूकी का आरोप, पत्रकार की नहीं सुनी फरियाद

शहाबगंज, चंदौली। जनपद में पुलिसिंग को लेकर बड़े दावे और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर एक बार फिर सामने आया है। एक ओर नवागत पुलिस अधीक्षक आकाश पटेल ने मीडिया और जनता की समस्याओं के त्वरित निस्तारण का भरोसा दिया, वहीं दूसरी ओर शहाबगंज थाने की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

क्या है मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, UP 18 News के ब्यूरो चीफ परीक्षित उपाध्याय ने कुछ दिन पूर्व अपनी समस्या को लेकर एसपी को प्रार्थना पत्र सौंपा था।

उसी संदर्भ में जब वह साहबगंज थाने पहुंचे, तो वहां तैनात थानाध्यक्ष प्रियंका सिंह का व्यवहार कथित तौर पर असहयोगात्मक रहा।

आरोप है कि जैसे ही पत्रकार अपनी बात रखने के लिए SHO कार्यालय में प्रवेश करने लगे, उन्हें बीच में ही रोक दिया गया और उनकी बात सुने बिना बाहर जाने को कह दिया गया। इस दौरान उनकी समस्या को गंभीरता से नहीं लिया गया, जिससे नाराजगी बढ़ गई।

एसपी के दावों पर उठे सवालगौरतलब है कि हाल ही में एसपी आकाश पटेल ने मीडियाकर्मियों के साथ बैठक कर यह आश्वासन दिया था कि—मीडियाकर्मियों की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाएगाफरियादियों की सुनवाई में कोई कोताही नहीं होगी

पुलिस-जनता के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा

लेकिन इन आश्वासनों के 24 घंटे के भीतर ही सामने आई इस घटना ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।“जब पत्रकार की नहीं सुनी, तो आम जनता का क्या?”इस घटना के बाद क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है कि जब एक पत्रकार की बात नहीं सुनी जा रही, तो आम नागरिकों की समस्याओं का निस्तारण किस प्रकार किया जाता होगा।पत्रकारों में रोष, कार्रवाई की मांग

स्थानीय पत्रकारों में इस घटना को लेकर काफी रोष है। उनका कहना है कि इस प्रकार का व्यवहार न केवल मीडिया का अपमान है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की भावना के भी विपरीत है।

कार्रवाई की उम्मीदमामले को लेकर उम्मीद जताई जा रही है कि एसपी आकाश पटेल इस प्रकरण का संज्ञान लेंगे और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित थानाध्यक्ष के खिलाफ उचित कार्रवाई करेंगे।यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या पुलिस महकमे में नीचे स्तर तक अधिकारियों के निर्देशों का पालन हो रहा है या नहीं। अब सभी की नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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