​”लोकतंत्र में आवाज़ दबाना ही हार की पहली निशानी है!”

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दीवारें शरीर को कैद कर सकती हैं, विचारधारा को नहीं!”

रिपोर्ट दीपक चौहान

​आज बुलंदशहर प्रशासन ने उच्चाधिकारियों के आदेश पर मुझे (प्रिंस जादौन) दिल्ली कूच करने से पहले ही मेरे निवास पर नजरबंद कर दिया। अपनी बात रखना और शांतिपूर्ण विरोध करना हमारा संवैधानिक अधिकार है, जिसे आज कुचला गया है।​मैं सत्ता के गलियारों में बैठे लोगों को बता देना चाहता हूँ कि दंडात्मक कार्यवाहियों से ‘सनातन रक्षा वाहिनी’ झुकने वाली नहीं है। UGC के जनविरोधी नियमों के खिलाफ हमारा संकल्प पत्थर की लकीर है।​हमारा लक्ष्य: एक ऐसा समाज जहाँ जाति नहीं, योग्यता और आर्थिक स्थिति सम्मान का आधार हो। जब तक सरकार कदम पीछे नहीं खींचती, यह वैचारिक युद्ध जारी रहेगा।

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