मिर्जापुर: सेतु निगम और प्रशासन की बड़ी लापरवाही! सांसद के निर्देशों के बावजूद आम घाट पुल की मरम्मत अधर में, जनता हलकान
मिर्जापुर: जिले में विकास के दावों की पोल किस तरह से निर्माण एजेंसियां खोल रही हैं, इसकी बानगी मिर्जापुर-वाराणसी राजमार्ग (एनएच-7) पर स्थित आम घाट रेलवे ओवरब्रिज पर साफ देखी जा सकती है। करोड़ों रुपये की लागत से बने इस अति-महत्वपूर्ण पुल के एप्रोच मार्ग के धंसने और जर्जर होने के बावजूद, स्थानीय प्रशासन और सेतु निगम की सुस्ती ने जनता को बड़े खतरे के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। जनप्रतिनिधियों और सांसद के स्पष्ट आदेशों के बाद भी जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई न होने से आम जनता में भारी रोष व्याप्त है।
क्या है पूरा मामला? (बैकग्राउंड)
मिर्जापुर-वाराणसी राजमार्ग पर खजुरी नदी के पास आम घाट रेलवे क्रॉसिंग पर लगभग 64 करोड़ रुपये की लागत से रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण कराया गया था। इस पुल का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इसी साल (वर्ष 2026 के शुरुआती महीनों में) इसका उद्घाटन हुआ था।
लेकिन, निर्माण की लचर गुणवत्ता और प्रशासनिक उदासीनता का आलम यह रहा कि यह पुल अपनी पहली ही बरसात का दबाव नहीं झेल सका। बारिश के कारण पुल का भारी-भरकम एप्रोच मार्ग अचानक धंस गया और सड़क किनारे की दीवारें लटक गईं। इसके चलते यहां कभी भी कोई बड़ा सड़क हादसा होने की आशंका बनी हुई है।
सांसद के सख्त निर्देश, फिर भी सेतु निगम बेखबर
मामले की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्र की सांसद एवं केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने स्थिति पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की थी। उन्होंने स्थानीय प्रशासन और विशेष रूप से सेतु निगम के अधिकारियों को तलब करते हुए पुल व एप्रोच मार्ग की तत्काल प्रभाव से मरम्मत कराने और पूरे मामले की रिपोर्ट पेश करने के सख्त निर्देश दिए थे।
बावजूद इसके, कागजी आदेशों और निर्देशों के इतर धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। सेतु निगम के अधिकारियों की सुस्त कार्यशैली के चलते समय पर मरम्मत का कार्य शुरू नहीं हो सका है, जिससे जनप्रतिनिधि के आदेशों की सरेआम धज्जियां उड़ती नजर आ रही हैं।
प्रशासन की चुप्पी और जनता की जान जोखिम में
इस गंभीर लापरवाही पर स्थानीय जिला प्रशासन की चुप्पी कई बड़े सवाल खड़े करती है। घटना के हफ़्तों बीत जाने के बाद भी जिम्मेदार महकमे द्वारा कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई या त्वरित निर्माण सुधार कार्य न किया जाना यह दर्शाता है कि प्रशासनिक अमले को किसी बड़े हादसे का इंतजार है।
- दुर्घटना को खुला निमंत्रण: पुल का एक हिस्सा धंसने और सड़क फटने के बावजूद भारी वाहनों व आम जनता का आवागमन जारी रहना जीवन के साथ सीधा खिलवाड़ है।
- भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप: स्थानीय नागरिकों और राहगीरों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बने पुल का कुछ ही महीनों में इस तरह जर्जर हो जाना उच्च स्तर पर बरती गई अनियमितता और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
जनता में आक्रोश, उठ रही हैं ये मांगें
आम घाट पुल की बदतर हालत और प्रशासन की इस बेपरवाही से गुस्साए स्थानीय लोगों और वाहन चालकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द पुल की उच्चस्तरीय मरम्मत और सुरक्षात्मक कार्य नहीं कराए गए, तो वे सड़क पर उतरकर जोरदार आंदोलन करने को बाध्य होंगे।








