ड्रमंडगंज में वन विभाग की करोड़ों की जमीन पर भूमाफियाओं की नजर, वन दरोगा पर लगे सांठगांठ के गंभीर आरोप
- अवैध कब्जों का गढ़ बन रहा ड्रमंडगंज वन रेंज क्षेत्र, विभाग की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
- स्थानीय लोगों का आरोप: जिम्मेदारों की शह पर धड़ल्ले से हो रहा जमीनों का प्लॉटिंग और अतिक्रमण
मिर्जापुर: जिले के ड्रमंडगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत वन विभाग की करोड़ों रुपये की बेशकीमती जमीनें इन दिनों भूमाफियाओं के निशाने पर हैं। आरोप है कि स्थानीय वन विभाग के ड्रमंडगंज रेंज के कुछ चुनिंदा कर्मचारियों और विशेष तौर पर एक वन दरोगा (Forester) की सीधी मिलीभगत से संरक्षित वन भूमि पर अवैध कब्जे का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। एक तरफ जहां सरकार व शासन स्तर पर अवैध अतिक्रमण के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति का दावा किया जा रहा है, वहीं मैदानी स्तर पर विभागीय संरक्ष्ण में सरकारी संपत्तियों को निगला जा रहा है।
करोड़ों की जमीन पर अवैध कब्जा और निर्माण
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ड्रमंडगंज क्षेत्र के कई जंगलों और वन विभाग की सीमा से लगी जमीनों पर पिछले कुछ महीनों से सुनियोजित तरीके से अवैध कब्जा किया जा रहा है। आरोप है कि रसूखदार लोग और भूमाफिया सांठगांठ कर रातों-रात पक्की दीवारें खड़ी कर रहे हैं या फिर बाउंड्रीवाल बनाकर जमीनों की अवैध खरीद-फरोख्त (प्लॉटिंग) कर रहे हैं। इस पूरे खेल में विभाग के जिम्मेदार बीट प्रभारी और संबंधित वन दरोगा की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, जो कथित तौर पर अपनी आंखों के सामने हो रहे इन अवैध कृत्यों पर या तो पर्दा डाल रहे हैं या फिर मौन समर्थन दे रहे हैं।
वन दरोगा की भूमिका पर उठ रहे सवाल
क्षेत्रीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि जब भी कोई आम ग्रामीण या गरीब अपनी जरूरत के लिए छोटी-मोटी लकड़ी या झोपड़ी जैसी बात करता है, तो वन विभाग का डंडा तुरंत चल जाता है। लेकिन जब बात करोड़ों की सरकारी जमीन पर बड़े पैमाने पर कब्जा करने वाले भूमाफियाओं की आती है, तो संबंधित वन दरोगा और मैदानी अमला कागजी खानापूर्ति कर खामोश बैठ जाता है।
नाम न छापने की शर्त पर स्थानीय लोगों ने बताया कि बिना विभागीय सहयता और चढ़ावे के इतनी बड़ी तादाद में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण होना असंभव है। आरोप है कि वन दरोगा की साठगांठ के कारण ही माफियाओं के हौसले बुलंद हैं।
कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति
मामले की सुगबुगाहट जब उच्च अधिकारियों तक पहुंचने लगती है, तो स्थानीय स्तर पर केवल नोटिस जारी करने या औपचारिकता निभाने का नाटक किया जाता है। जमीन पर धरातल पर अवैध निर्माण ज्यों का त्यों बना रहता है, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर भ्रष्टाचार के काले बादल मंडरा रहे हैं।
जिम्मेदारों के बयान
- इस संबंध में जब पत्रकारों ने उच्चाधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया, तो उन्होंने मामले की जांच कराकर सख्त कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
- ड्रमंडगंज क्षेत्र के इस बहुचर्चित मामले पर जब संबंधित प्रभागीय वंशीय अधिकारी (DFO) का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने कहा कि “यदि वन विभाग की जमीन पर अवैध कब्जा हुआ है और किसी कर्मचारी की मिलीभगत पाई जाती है, तो उसे कतई बख्शा नहीं जाएगा। मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर त्वरित बेदखली और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।”










