काशी में श्रीरामलीला की समृद्ध परंपरा, भक्ति और संस्कृति के संग जीवंत हो रहे प्रभु श्रीराम के आदर्शश्री गोस्वामी तुलसीदास रामलीला समिति की ओर से वार्षिक आयोजन, धार्मिक प्रसंगों के मंचन के माध्यम से जन-जन तक पहुंच रहा मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का संदेशवाराणसी
रिपोर्ट अजित शर्मा
। धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में श्रीरामलीला की परंपरा आज भी श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए हुए है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए श्री गोस्वामी तुलसीदास रामलीला समिति, मठ तुलसीपुरी, भदैनी, काशी की ओर से वार्षिक श्रीरामलीला समारोह का आयोजन किया जा रहा है। आयोजन से संबंधित तिथि-पत्र जारी कर श्रद्धालुओं को रामलीला की विभिन्न लीलाओं और उनके निर्धारित स्थलों की जानकारी दी गई है।श्रीरामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन, आदर्शों और मर्यादाओं को जनमानस तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है। रामायण के प्रसंगों का मंचन श्रद्धालुओं को धर्म, सत्य, त्याग, कर्तव्य, भाईचारे और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। प्रभु श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंग केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि समाज को आदर्श जीवन जीने की सीख भी देते हैं।समिति की ओर से जारी तिथि-पत्र में रामायण के अनेक प्रमुख प्रसंगों को शामिल किया गया है। इनमें भगवान श्रीराम के वनगमन, भरत मिलाप, शबरी मिलन, सुग्रीव से मित्रता, लंका दहन, अंगद-रावण संवाद तथा श्रीराम राज्याभिषेक जैसे प्रसंग प्रमुख हैं। इन लीलाओं के जरिए रामायण की कथा को पारंपरिक स्वरूप में प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को उससे जोड़ने का प्रयास किया जाता है।धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक विरासत का संरक्षणकाशी की रामलीला परंपरा धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ लोक संस्कृति और सामाजिक सहभागिता का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे आयोजनों में श्रद्धालुओं की भागीदारी से धार्मिक परंपराओं को निरंतरता मिलती है और नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति तथा मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों से परिचित होने का अवसर मिलता है।








श्री गोस्वामी तुलसीदास रामलीला समिति का यह आयोजन आस्था और सांस्कृतिक चेतना के संगम के रूप में देखा जा रहा है। रामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों को आत्मसात करने और समाज में सद्भाव, नैतिकता तथा धर्म के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया जा रहा है।समिति की ओर से श्रद्धालुओं से रामलीला में सहभागिता करने और प्रभु श्रीराम के जीवन प्रसंगों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया गया है।
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