वाराणसी:आज इस्लामिक साल के पहले महीने यानी मुहर्रम की 10 तारीख (यौम-ए-आशूरा) पर पूरा देश कर्बला के शहीदों को याद कर रहा है।
रिपोर्ट: अजित शर्मा
धर्म नगरी वाराणसी में भी इस मौके पर गहरा गम और अकीदत (श्रद्धा) देखने को मिल रही है। वाराणसी के लंका थाना क्षेत्र अंतर्गत संकट मोचन और साकेत नगर इलाकों में हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में अकीदतमंदों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा।
हक और सच्चाई की सबसे बड़ी मिसालमुहर्रम का यह दिन केवल एक इतिहास नहीं, बल्कि इंसानियत, इंसाफ और सच्चाई के लिए दी गई सबसे बड़ी कुर्बानी का प्रतीक है। आज से लगभग 1400 वर्ष पूर्व कर्बला के तपते मैदान में हजरत इमाम हुसैन ने जालिम शासक यजीद की तानाशाही और अधर्म के सामने झुकने के बजाय भूखे-प्यासे रहकर अपने प्राणों की आहुति देना स्वीकार किया था।


सुरक्षा व्यवस्था के बीच निकाला जा रहा जुलूसलंका थाना अंतर्गत आने वाले इन क्षेत्रों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के बीच शांतिपूर्ण तरीके से जुलूस निकाला जा रहा है। सदियों बाद भी इमाम हुसैन का संदेश आज भी प्रासंगिक है, यही कारण है कि आज भी दुनिया भर में हर वर्ग के लोग उनकी शहादत को नमन कर रहे हैं।










