चन्दौली में गूंजा ‘गौमाता-राष्ट्रमाता’ का उद्घोष: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी का भव्य स्वागत

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चन्दौली। सनातन धर्म के ध्वजवाहक और ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज की 81 दिवसीय ‘गोविष्ठि यात्रा’ अपने आठवें दिन चन्दौली जनपद पहुँची। इस दौरान समूचा जिला ‘गौमाता राष्ट्रमा

भव्य स्वागत और पादुका पूजन​यात्रा का आगाज

रिपोर्ट: मानस दीक्षित

गाजीपुर-चन्दौली बॉर्डर स्थित महुजी में हुआ, जहाँ समर्थकों के जनसैलाब ने महाराज श्री की अगवानी की। कार्यक्रम के मुख्य आयोजक और जिला प्रभारी श्री वैभव त्रिपाठी ने शंकराचार्य जी का विधिवत स्वागत कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके पश्चात, यात्रा धानापुर शहीद स्मारक पहुँची, जहाँ शहीदों को नमन करने के बाद ‘पादुका पूजन’ का विशेष अनुष्ठान संपन्न हुआ।

शंकराचार्य जी का आह्वान: “गाय को मिले राष्ट्रमाता का सम्मान”​जनसभा को संबोधित करते हुए शंकराचार्य जी ने गौ-वंश की दुर्दशा पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा:​”गौ हत्या को पूर्णतः प्रतिबंधित करना अब केवल इच्छा नहीं, बल्कि पूरे समाज का संकल्प होना चाहिए। सरकार को जनमानस की भावनाओं का सम्मान करते हुए गाय को अविलंब ‘राष्ट्रमाता’ घोषित करना चाहिए।

“​सांप्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल​इस कार्यक्रम की सबसे गौरवशाली तस्वीर तब दिखी जब शंकराचार्य जी के स्वागत में हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदायों ने हाथ मिलाया। एक ओर जहाँ शिवदत्त तिवारी, सोमदत्त द्विवेदी, अखिल पाण्डेय और प्रदीप पांडे ‘साजु’ जैसे लोग व्यवस्था संभाले हुए थे, वहीं दूसरी ओर सिराजुद्दीन ‘भुट्टो’ और एकराम्मुद्दीन बक्शी समेत मुस्लिम समाज के तमाम लोगों ने महाराज जी का स्वागत कर गंगा-जमुनी तहजीब को जीवंत कर दिया।

​शहीद गाँव से मुगलसराय तक भक्ति पथ​शंकराचार्य जी का काफिला शहीद गाँव, धरहरा और सकलडिहा होते हुए आगे बढ़ा। हर पड़ाव पर श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर उनका अभिनंदन किया।

​मुगलसराय (पीडीडीयू नगर) में भी…यात्रा का अगला मुख्य केंद्र मुगलसराय बना, जहाँ भक्तों का उत्साह चरम पर था। यहाँ के व्यापारिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने पलक-पावड़े बिछाकर शंकराचार्य जी का सत्कार किया और गौ-रक्षा के इस पुनीत अभियान में अपनी सहभागिता दर्ज कराने का संकल्प लिया।

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