ईंट भट्टों की परमिशन की आड़ में ‘पीली मिट्टी’ का काला खेल, छतारी पुलिस ने झाड़ा पल्ला

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शिकायत करने पर पत्रकार को दी जा रही धमकी, माफियाओं को ‘खाकी’ का अभय दान!

रिपोर्ट दीपक चौहान

दिन-दहाड़े अवैध खनन से छलनी हो रही धरती, प्रशासनिक अधिकारियों ने साधी चुप्पी

बुलंदशहर (ब्यूरो)। थाना छतारी क्षेत्र के अंतर्गत ‘छतारी दुराहे’ पर इन दिनों कानून के रक्षक ही भक्षकों के मददगार बने हुए हैं। क्षेत्र में ईंट भट्टों की परमिशन की आड़ में बड़े पैमाने पर अवैध मिट्टी भराव और खनन का धंधा फल-फूल रहा है। ताज्जुब की बात यह है कि यह पूरा खेल दिन के उजाले में प्रशासन की नाक के नीचे चल रहा है, लेकिन संबंधित विभाग मूकदर्शक बना हुआ है।

शिकायत पर मिला टका सा जवाब

स्थानीय स्तर पर जब इस अवैध कार्य की शिकायत थाना छतारी प्रभारी से की गई, तो उन्होंने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए इसे खनन विभाग का मामला बता दिया। प्रभारी का कहना है कि यह उनका काम नहीं है, जबकि कानूनन पुलिस को अवैध गतिविधियों को रोकने का पूर्ण अधिकार है।

ऑडियो से हुआ बड़ा खुलासा

हमारे मीडिया/संस्थान India Samachar 24×7 के पास मौजूद एक विशेष ऑडियो क्लिप में प्रशासनिक अधिकारियों की संवेदनहीनता साफ झलक रही है। पत्रकार द्वारा डंपरों और ट्रैक्टरों की सटीक लोकेशन और अवैध प्लाटिंग में हो रहे भराव की जानकारी देने के बावजूद, अधिकारी ‘लखनऊ में होने’ और ‘कल देखने’ का बहाना बनाकर मामले को टालते नजर आ रहे हैं। यह ऑडियो स्पष्ट करता है कि खनन माफियाओं के तार ऊंचे पदों पर बैठे अधिकारियों से जुड़े हुए हैं।

पत्रकार पर बनाया जा रहा दबाव

हैरानी की बात यह है कि जब भी कोई पत्रकार इस अवैध खनन और भ्रष्टाचार को उजागर करने की कोशिश करता है, तो उसे माफियाओं और उनके संरक्षणदाताओं द्वारा डराया-धमकाया जाता है। सूत्रों के मुताबिक, खनन माफियाओं को प्रशासन की ओर से ‘हरी झंडी’ मिली हुई है, जिसके कारण उनके हौसले बुलंद हैं और वे सरेआम सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।

खनन अधिकारी की चुप्पी पर सवाल

​क्या ईंट भट्टों की परमिशन की आड़ में हो रहा यह खनन अधिकारियों की जेबें भर रहा है?​

आखिर क्यों पुलिस और खनन विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल कर माफियाओं को समय दे रहे हैं?

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