पुरातत्व संग्रहालय में नागालैंड केंद्रीय विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों का शैक्षणिक भ्रमण

रिपोर्ट: रोहित सेठ

*पुरातत्व संग्रहालय में नागालैंड केंद्रीय विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों का शैक्षणिक भ्रमण*—-

 

शैक्षणिक भ्रमण के दौरान सभी विद्यार्थियों ने कौतुहल भरे स्वर में संग्रहालय के धरोहर को सराहा—

 

अन्य विद्यार्थियों के शैक्षणिक यात्रा से यहां के विद्यार्थियों को ऊर्जा और ज्ञान की वृद्धि होगी– डॉ विमल कुमार त्रिपाठी।

 

यहाँ पर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के विभिन्न रहस्यों को समेटे हुये अद्भुत संग्रहालय है उक्त विचार सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी में स्थित पुरातत्व संग्रहालय में आज नागालैंड केंद्रीय विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग के 21 विद्यार्थियों द्वारा प्रोफेसर अंबरीश सिंह के निर्देशन में पुरातत्व संग्रहालय शैक्षणिक भ्रमण के दौरान सभी विद्यार्थियों ने कौतुहल भरे हर्षित मुद्रा में व्यक्त किये।

सभी विद्यार्थियों ने संग्रहालय के विभिन्न ऐतिहासिक महत्व और आयामों पर सूक्ष्मता से अवलोकन कर प्रश्नों के अपने -अपने विचार व्यक्त किये।

विश्वविद्यालय के संग्रहालय अध्यक्ष डॉ विमल कुमार त्रिपाठी ने नागालैंड के शैक्षणिक यात्रा के संबंध में बताया कि संग्रहालय द्वारा विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की प्राचीनता, स्थापना, उद्देश्य एवं गतिविधियों के साथ-साथ संग्रहालय की संग्रहित कलाकृतियों के विषय में व्यापक ज्ञानवर्धन किया गया।इससे यहां के विद्यार्थियों को भी ज्ञान राशि का पान करने का सुनहरा अवसर सिद्ध होगा।

उक्त सभी विद्यार्थी प्राचीन भारतीय कला एवं संस्कृति को संग्रहालय की कलाकृतियों के माध्यम से रुचि पूर्वक समझ कर अभिभूत होते हुए नागालैंड की संस्कृति और कला को साझा किया।

डॉ त्रिपाठी ने कलाकृति संरक्षण विज्ञान के विषय में जानकारी देते हुए बताया कि सांस्कृतिक संपत्ति के संबंध में , संरक्षण विज्ञान वैज्ञानिक जांच के उपयोग के माध्यम से कला, वास्तुकला, तकनीकी कला इतिहास और अन्य सांस्कृतिक कार्यों के संरक्षण का अंतःविषय अध्ययन है। अनुसंधान के सामान्य क्षेत्रों में कलात्मक और ऐतिहासिक कार्यों की तकनीक और संरचना शामिल है। दूसरे शब्दों में, वे सामग्री और तकनीक जिनसे सांस्कृतिक, कलात्मक और ऐतिहासिक वस्तुएं बनाई जाती हैं। सांस्कृतिक विरासत के संबंध में संरक्षण विज्ञान की तीन व्यापक श्रेणियां हैं: 1) कलाकारों द्वारा उपयोग की जाने वाली सामग्री और तकनीकों को समझना, 2) गिरावट के कारणों का अध्ययन, और 3) परीक्षा और उपचार के लिए विधियों / तकनीकों और सामग्रियों में सुधार करना।

इस तरह से उन्हें विभिन्न विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई।

अनमोल संग्रह

यह संग्रहालय प्राच्य विद्याओं का अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों तथा अन्य लोगों के लिए 06 अक्टूबर 1958 को स्थापित किया गया था जिसमें लगभग 5 हजार कलाकृतियाँ एवं पुरातन सामाग्री संगृहीत हैं, जो भारतीय इतिहास के विभिन्न कालखण्ड एवं क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करती हैं।

डॉ विमल कुमार त्रिपाठी ने बताया कि इस संग्रहालय को और सशक्त और स्तरीय बनाने का प्रयास किया जा रहा है जिसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन एवं शासन का सहयोग भी प्राप्त हो रहा है।

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