महिंद्रा कबीरा फेस्टिवल 2023 का ग्रैंड म्यूजिकल फिनाले

वाराणसी रिपोर्ट रोहित सेठ

आज महिंद्रा कबीरा फेस्टिवल के सातवें अध्याय का समापन हुआ| वाराणसी के ऐतिहासिक घाटों पर दो-दिन तक चलने वाला यह फेस्टिवल कई मायनों में ख़ास रहा| इसमें भाग लेने के लिए श्रोता देश और विदेश के विभिन्न भागों से आए, जहाँ उन्हें क्लासिक, फोक और फ्यूज़न संगीत के माध्यम से कबीर के ज्ञान को जानने का मौका मिला| इसी के साथ उन्हें हेरिटेज वाक, मंदिर दर्शन, गंगा आरती, बोट राइड और बनारस के विशेष व्यंजनों का लुत्फ़ लेने का अवसर भी मिला|

ये शानदार अनुभव यकीनन लम्बे अरसे तक श्रोताओं के दिलों में ताज़ा रहेगा|

टीमवर्क आर्ट्स के मैनेजिंग डायरेक्टर, संजॉय के.रॉय ने कहा, “महिंद्रा कबीरा फेस्टिवल में गंगा किनारे आयोजित सुबह का सुकून देने वाला संगीत और शाम की शानदार परफॉरमेंस अगले साल तक हमारे दिलों में गूंजती रहेगी| बनारस की गर्मजोशी और कबीर के समयातीत ज्ञान के हम तहेदिल से आभारी हैं|

महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड के कल्चरल आउटरीच-हेड, जय शाह ने कहा, “महिंद्रा कबीरा फेस्टिवल में हम कलाकारों को वो मंच प्रदान करते हैं, जहाँ वे कबीर की शिक्षाओं को विभिन्न माध्यमों से अभिव्यक्त कर सकें| फेस्टिवल के दौरान श्रोताओं की खुशी और संतुष्टि से हमें एहसास होता है कि हम सही राह पर अग्रसर हैं| भविष्य में भी हम ज्ञान और प्रेम की इस धारा को यूं ही प्रवाहित करते रहना चाहते हैं|”

गुलेरिया घाट पर दिन की शुरुआत प्रतिभाशाली हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक, पुर्नेश भागवत द्वारा प्रस्तुत कबीर भजन से हुई| कबीर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए पुर्नेश ने कहा, “महिंद्रा कबीरा फेस्टिवल के सुबह के सत्र में परफॉर्म करना अपने आप में एक आध्यात्मिक सफर है। मैं खुद बनारस से हूं, लेकिन जो माहौल ये फेस्टिवल आपको प्रदान करता है, वो कहीं मिल पाना मुश्किल है। कबीरा फेस्टिवल में परफॉर्म करना मेरे लिए हर्ष का विषय है।” इसके बाद बांसुरी और आघात वाद्ययंत्र की जुगलबंदी के माध्यम से कार्तिकेय और मकरंद ने कबीर को व्यक्त किया| उनका मंच पर साथ दिया उस्ताद अनवर खान मांगनियार ने| अनवर खान ने एक रात पहले भी फेस्टिवल में प्रस्तुति दी थी| श्रोताओं को संबोधित करते हुए कार्तिकेय ने कहा, “मैं यहां उपस्थित प्रत्येक श्रोता का आभार व्यक्त करना चाहता हूँ| भिन्न-भिन्न स्थानों से आकर, हम इस सुहानी सुबह में एकत्र हुए हैं| इससे परफेक्ट और कुछ नहीं हो सकता| बनारस भगवान शिव की नगरी है और हम अपनी परफॉरमेंस की शुरुआत राग अहीर भैरव से करेंगे| ये भगवान शिव को हमारा नमन है|”

गुलेरिया घाट पर आयोजित, एक विचारोत्तेजक सत्र में पुरुषोत्तम अग्रवाल से संवाद किया सौम्या कुलश्रेष्ठ ने| पुरुषोत्तम अग्रवाल ने कहा, “कबीर समयातीत हैं| अगर हम आज कबीर को, या शेक्सपियर को, या ग़ालिब को याद करते हैं, तो यकीनन वे आज के समय में लिख रहे सैंकड़ों अन्य लोगों से अधिक महत्वपूर्ण हैं|”

फेस्टिवल के मुख्य आकर्षणों में से एक लाइव पेंटिंग भी था, जिसकी रचना पद्म श्री से सम्मानित परेश मैटी ने, फेस्टिवल वेन्यू पर, दर्शकों के सामने ही की|

सुर, शब्द और लय की जादुई श्रृंखला के साथ, शिवाला घाट पर कबीरा फेस्टिवल का समापन हुआ| दिल्ली पब्लिक स्कूल वाराणसी ने अपनी शानदार प्रस्तुति से माहौल में ऊर्जा भर दी, जिसमें और रोमांच जोड़ा वासु दीक्षित कलेक्टिव की दमदार प्रस्तुति ने| इस ग्रुप ने न सिर्फ अपना म्यूजिकल टैलेंट दिखाया, बल्कि कबीर को भी एक नये रूप में प्रस्तुत किया| ग्रैंड फिनाले की समाप्ति हुई लोकप्रिय बैंड, इंडियन ओसियन की जबरदस्त परफॉरमेंस के साथ| उन्होंने अपने खास अंदाज में कबीर और उनके ज्ञान को प्रस्तुत किया|

फेस्टिवल में अभिव्यक्त, कबीर से जुड़े संगीत और विचारों ने श्रोताओं के दिलों को छू लिया| तीन दिवसीय यह फेस्टिवल कबीर की धरोहर को यूं ही आगे बढ़ाने को प्रतिबद्ध है|

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